मुजफ्फरपुर : निगम में 3.80 करोड़ रुपये ऑटो टिपर खरीद घाेटाला में फंसे तत्कालीन कार्यपालक अभियंता बिंदा सिंह ने भी विशेष निगरानी कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की है.
उन्होंने अग्रिम जमानत की अर्जी कोर्ट में तब दाखिल की, जब मामले की जांच कर रहे विजिलेंस के नये अनुसंधानक डीएसपी मनोज कुमार श्रीवास्तव ने उनके पथ निर्माण विभाग को पत्र लिख कोर्ट में फाइनल चार्जशीट करने से पूर्व अभियोजन स्वीकृत की अनुमति मांगी.
हालांकि मामले की सुनवाई करने के बाद विशेष निगरानी न्यायाधीश ने विजिलेंस से केस डायरी की मांग की है. कोर्ट ने सुनवाई के लिए 10 जनवरी 2020 की तिथि निर्धारित की है. 12 दिसंबर 2018 को पटना विजिलेंस थाना में घोटाले की प्राथमिकी दर्ज
की गयी थी.
विभाग को विजिलेंस ने लिखा पत्र
मुजफ्फरपुर : घोटाले की प्राथमिकी के एक साल से अधिक समय हो जाने के बाद विजिलेंस अब मामले में फंसे मेयर सहित दो पूर्व नगर आयुक्त व छह इंजीनियर के विरुद्ध फाइनल चार्जशीट की कवायद में है.
पिछले सप्ताह नगर आयुक्त मनेश कुमार मीणा ने आरोपित छह इंजीनियरों के पैतृक विभाग की जानकारी विजिलेंस को उपलब्ध करायी थी. इसके बाद केस के आइओ ने सभी छह इंजीनियरों के अलग-अलग पैतृक विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिख जल्द से जल्द अभियोजन स्वीकृत देने का आग्रह किया. तत्कालीन कार्यपालक अभियंता बिंदा सिंह व कनीय अभियंता क्यामुद्दीन अंसारी के लिए पथ निर्माण विभाग को पत्र लिखा गया है.
वहीं, नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव को दो कनीय अभियंता प्रमोद कुमार सिंह व भरत लाल चौधरी एवं तत्कालीन सहायक अभियंता व वर्तमान में नगर निगम में तैनात सहायक अभियंता नंद किशोर ओझा के लिए जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिख विजिलेंस ने अनुमति मांगी है. इस मामले में मेयर सुरेश कुमार, पूर्व नगर आयुक्त रमेश प्रसाद रंजन, रिटायर एडीएम रंगनाथ चौधरी सहित छह इंजीनियर व टिपर आपूर्ति कर्ता एजेंसी के मैनेजर को नामजद अभियुक्त बनाया गया था.
