मुजफ्फरपुर : स्वास्थ्य विभाग जिले में डॉक्टरों समेत अन्य कर्मियों की मॉनीटरिंग ऑनलाइन करेगा. इसके लिए डॉक्टरों व कर्मियों के मोबाइल सिम के जरिए विशेष तरह का जीपीएस लगाया जायेगा. इससे डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी के दौरान कार्यस्थल पर मौजूद हैं या नहीं, इसकी ऑनलाइन मॉनीटरिंग हो सकेगी. पटना में इस पर युद्धस्तर पर काम हो रहा है. पहले चरण में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के आयुष डॉक्टरों के मोबाइल में इसे फीड किया जायेगा.
जीपीएस से डॉक्टरों की होगी मॉनीटरिंग
मुजफ्फरपुर : स्वास्थ्य विभाग जिले में डॉक्टरों समेत अन्य कर्मियों की मॉनीटरिंग ऑनलाइन करेगा. इसके लिए डॉक्टरों व कर्मियों के मोबाइल सिम के जरिए विशेष तरह का जीपीएस लगाया जायेगा. इससे डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी के दौरान कार्यस्थल पर मौजूद हैं या नहीं, इसकी ऑनलाइन मॉनीटरिंग हो सकेगी. पटना में इस पर युद्धस्तर पर काम […]

यह स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर तरीके से लागू करने और बीमारी, इलाज की रिपोर्ट पर संदेह को देखते हुए यह पहल हो रही है. इस नये सिस्टम में सभी डॉक्टरों के मोबाइल नंबर को फीड करने की जवाबदेही सीएस डॉ शैलेश सिंह ने डीपीएम बीपी वर्मा को जिम्मेवारी सौंपी है. डीपीएम ने कहा कि अभी इस पोर्टल को स्थानीय स्तर पर डेवलप किया जा रहा है. यह नया सिस्टम जल्द जिले में लॉंच किया जायेगा.
40 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की जांच नहीं : आरबीएसके के तहत जिले के सभी सरकारी स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की शत-प्रतिशत स्वास्थ्य जांच करनी है, लेकिन बीते वित्तीय वर्ष में 40 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की जांच नहीं हो सकी. भारत सरकार ने जिले के सरकारी स्कूलों के चार लाख 88 हजार 86 बच्चों को आरबीएसके के तहत स्वास्थ्य जांच करने आदेश दिया था.
इनमें से दो लाख 53 हजार 645 बच्चों की ही जांच हुई. इनमें से मात्र 11 हजार बच्चों में ही बीमारी निकली. कुपोषण की संख्या काफी कम थी, जबकि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में दस में तीन बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. इसके साथ ही जंक फूड से होनेवाली बीमारियों की सही से रिपोर्ट नहीं की गयी है.