मुजफ्फरपुर : फॉग्सी(फेडरेशन आॅफ ऑब्स्टेट्रिक्सएंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी) के तत्वाधान में आयोजित सेमिनार के तीसरे व अंतिम दिन रविवार को देश के कई शहरों से आये प्रख्यात डॉक्टरों ने अपने व्याख्यान से स्थानीय डॉक्टरों को रूबरू कराया. महिलाओं में होने वाली विभिन्न अंदरूनी बीमारियों के रोकथाम के लिये नये शोध के आधार पर इलाज करने की सलाह दी.
सुरक्षित प्रसव के लिए डॉक्टरों को कई टिप्स दिये. डॉक्टरों ने कहा कि महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर अधिक हो रही है. हर साल पूरे देश में एक लाख महिलाएं ग्रीवा कैंसर से ग्रसित होती हैं. इसका कारण गर्भधारण के तीन माह तक जांच नहीं कराना व अधिक उम्र में शादी बतायी जा रही है. सबसे अधिक शिशुओं की मौत गर्भ में ही होती है. इसे बचाया जा सकता है, यदि महिलाओं को गर्भधारण के बाद क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए आदि की जानकारी दी जाये.
डॉ अभय पटनायक ने कहा कि अल्ट्रासाउंड से अगर बच्चे के विकास को देखा जाये, तो जच्चा-बच्चा दोनों ही सुरक्षित रह सकते हैं. डॉ प्रतिमा सिंह, डॉ रोहित गुटगुटिया और डॉ वासुदेव पानीकर ने कहा कि सर्जरी के दौरान बच्चदानी को निकाला जाता है तो उस वक्त अत्यधिक रक्तस्राव होने लगता है. इससे प्रसूता की मौत भी हो जाती है.
डॉ वासुदेव पानीकर ने कहा कि सर्जरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव को रोक सकते हैं. उन्होंने सभी के सामने एक यंत्र दिखाया, जिससे बिना चीड़फाड़ किये बच्चेदानी को बाहर निकाला जा सकता है. मौके पर हीरा लाल कॉमर, डॉ रंगीला सिन्हा, डॉ रंजना मिश्रा, डॉ मंजू, डॉ नीलम सिन्हा, डॉ नयन तारा, डॉ शाेभा रानी मिश्रा, डॉ आरती द्विवेदी, डॉ आभा सिंह, डॉ कुमारी विभा, डॉ सुषमा आलोक,डॉ स्मिता कर्ण आदि उपस्थित थीं.
पांच डॉक्टरों को मिला डॉ रंगीला सिन्हा अवार्ड
फॉग्सी के तत्वावधान में आयोजित सेमिनार में देश भर से आये डॉक्टरों ने अपने नये नये रिसर्च से सभी को अवगत कराया. इसमें सबसे बेहतर रिसर्च करने वाले पांच डॉक्टरों को डॉ रंगीला सिन्हा अवार्ड से नवाजा गया. अवार्ड लेने वाले डॉ अंजली कुमारी, डॉ शालिनी सुमन, डॉ तनू, डॉ स्नेहहिल और डॉ अमृता प्रतिमा शामिल हैं.
अगर प्रसूता को बच्चे के जन्म देने की तिथि पूरी हो गयी है और उसे दर्द नहीं हो रहा है तो उसे दवा देकर दर्द कराना चाहिए. अधिक समय तक शिशु को गर्भ में नहीं रहने देना चाहिए. इससे मां और बच्चे दोनों के जान पर खतरा बन सकता है. अधिक समय तक गर्भ में बच्चे के रहने के कारण ही उसकी मौत हो रही है. हर पांच सौ में एक बच्चे की मौत इसी कारणों से होती है.
डॉ भाष्कर पाल, कोलकाता
प्रसव के दौरान ही कई बच्चों की मौत होती है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि प्रसूता समय पर जांच नहीं कराती हैं. इससे हाई ब्लड प्रेशर, शरीर में कम ब्लड, बच्चे का अधिक विकास नहीं होना देखा गया है. शिशु मृत्युदर में 50 प्रतिशत की कमी आ सकती है, अगर प्रसूता अगर समय पर जांच कराएं, शरीर में ब्लड की कमी न होने दें तो प्रसव के दौरान बच्चे की मौत नहीं होगी.
डॉ सीमा ठाकुर, दिल्ली
