मोतिहारी : बिहार के गांवों में चीन के एफएम की पहुंच

सच्चिदानंद सत्यार्थी, मोतिहारी नेपाल की सीमा से सटे उत्तर बिहार के गांवों में चीन के एफएम रेडियो की आवाज पहुंच रही है. स्थानीय लोगों को भले ही इसकी भाषा समझ में नहीं आती, लेकिन वे कौतूहलवश इसे सुनते हैं. नेपाल से प्रसारित होनेवाले एफएम पहले से ही सीमावर्ती गांवों में लोकप्रिय हैं. गृह मंत्रालय ने […]

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सच्चिदानंद सत्यार्थी, मोतिहारी

नेपाल की सीमा से सटे उत्तर बिहार के गांवों में चीन के एफएम रेडियो की आवाज पहुंच रही है. स्थानीय लोगों को भले ही इसकी भाषा समझ में नहीं आती, लेकिन वे कौतूहलवश इसे सुनते हैं. नेपाल से प्रसारित होनेवाले एफएम पहले से ही सीमावर्ती गांवों में लोकप्रिय हैं. गृह मंत्रालय ने गांवों में नेपाली एफएम के बाद चाइना (चीन) एफएम की पहुंच को गंभीर माना है.
इस संबंध में गृह मंत्रालय ने एक रिपोर्ट भी मंगायी है.जिले के करीब डेढ़ दर्जन गांवों में चीन से प्रसारित होनेवाले एफएम की पहुंच है. ऐसे गांव आदापुर, छौड़ादानो और लखौरा के हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें यह भाषा समझ में नहीं आती, लेकिन वे सिर्फ इसलिए
सुनते हैं कि क्योंकि इसका प्रसारण चीन से है. इस मामले की जानकारी मिलने के बाद गृह मंत्रालय ने मोतिहारी स्थित दूरदर्शन अनुरक्षण केंद्र से रिपोर्ट मांगी थी, जो हाल ही में उसे भेजी गयी है.
तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन से प्रसारित होनेवाले एफएम की फ्रीक्वेंसी काफी उच्चस्तर की है और इसका रिले टावर काफी ऊंचाई पर लगाया गया है. यही वजह है कि सीमावर्ती गांवों में इसकी पहुंच आसान है. दूसरी तरफ इसे रोकने का कोई तकनीकी इंतजाम नेपाल की सीमा पर नहीं है. भारत-चीन संबंधों के जानकार दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंध के परिप्रेक्ष्य में इसे सामरिक और राजस्व की दृष्टि से भारत के लिए खतरा मान रहे हैं. इसके पहले चीन ने नेपाल के रास्ते अपने उत्पाद भारत में पहुंचाया था.
भाषा समझ में नहीं आती, पर कौतूहलवश सुन रहे लोग
नेपाल के एफएम भी सीमावर्ती गांवों में लोकप्रिय. रक्सौल और मोतिहारी के गांवों में नेपाली रेडियो खूब लोकप्रिय हैं. इनकी संख्या करीब छह है. दो चैनल तो सिर्फ भोजपुरी गीतों और कार्यक्रमों का ही प्रसारण करते हैं. उन पर भारत की खबरें भी प्रसारित होती हैं. सीमा के कुछ गांवों में नेपाली भाषा समझी और बोली जाती है.
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