मुजफ्फरपुर : प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुसार प्रोत्साहन राशि देने व अन्य मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं ने सदर अस्पताल से जुलूस निकाला. आशा कार्यकर्ताओं ने सबसे पहले रजिस्ट्रेशन काउंटर को बंद करवा दिया. इसके बाद ओपीडी बंद कराने पहुंची. ओपीडी बंद कराने के दौरान आशा कार्यकर्ताओं व मरीजों के बीच नोकझोंक हो गयी.
इस दौरान करीब आधे घंटे तक ओपीडी बाधित रही. सूचना मिलने पर पहुंचे अस्पताल प्रबंधक प्रवीण कुमार व उपाधीक्षक डॉ एनके चौधरी ने मरीजों व आशा कार्यकर्ताओं को समझा कर मामले को शांत कराया. तब ओपीडी चालू करायी गयी. इसके बाद आशा जुलूस के साथ आयुक्त कार्यालय पहुंचीं. यहां आशा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और नारेबाजी की. उन्होंने एएनएम की तर्ज पर उन्हें भी प्रशिक्षण देकर एएनएम में बहाल करने और कम से कम अठारह हजार रुपये व सरकारी सेवक सरकार घोषित करने की मांग की.
आशा ने सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
तीन दिवसीय आंदोलन के अंतिम दिन जिले भर की आशा कार्यकर्ता शामिल हुईं. इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की. ओपीडी, इमरजेंसी व प्रसव वार्ड को बंद कराने का प्रयास किया. जुलूस निकाल कर विरोध जताया.
शा कार्यकर्ताओं का कहना था कि उनको निर्धारित मानदेय दिया जाये. बकाया प्रोत्साहन राशि का अविलंब भुगतान किया जाये. अस्पतालों में कर्मचारी सही से व्यवहार नहीं करते हैं. आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मरीजों को इलाज के लिए लाते हैं, तो परेशान किया जाता है. सरकारी प्रावधान के तहत आशा से काम लिया जाये. सदर अस्पताल के लेबर कक्ष में सही व्यवहार किया जाये. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो अनिश्चितकालीन आंदोलन करने को बाध्य हो जायेंगी. आशा कार्यकर्ताओं ने सिविल सर्जन को मांगों पत्र भी सौंपा. मौके पर बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ की जिलाध्यक्ष शीला शर्मा, कार्यकारी जिला सचिव पुनीता पांडेय, मंजू देवी, नंदनी कुमारी, विनीता कुमारी, बबीता देवी, उषा देवी आदि शामिल थीं.
