मुजफ्फरपुर: जंकशन के यूटीएस काउंटरों पर यात्रियों की उमड़ रही भीड़ के बीच रेलवे कर्मियों की मनमानी चरम पर है. इसके कारण बुधवार की रात्रि हुई घटना की फिर पुनरावृत्ति हो सकती है. टिकट वापसी को लेकर बुधवार की रात्रि हुए बवाल के बाद रेलवे चेता जरूर है.
मगर काउंटर पर तैनात कर्मचारियों की मनमानी से स्पष्ट है कि रेलवे भले ही यात्री सुविधा को प्राथमिकताएं देकर काम कर रही है, लेकिन कर्मियों के लिए खुद की सुविधा प्राथमिकता है. बुधवार की रात्रि हुए बवाल के बाद भी गुरुवार को कर्मचारियों की मनमानी व मौज-मस्ती कम नहीं था.
दोपहर करीब डेढ़ बजे डीसीआइ ने बताया कि यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए सात काउंटरों से टिकट की बिक्री की जा रही है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयान कर रही थी. बीच के चार काउंटर ही खुले थे. बाकी सभी काउंटर बंद थे. तीन-चार की संख्या में पुलिस कर्मी भी तैनात थे, लेकिन शौचालय के सामने लगे कुरसी-टेबुल पर बैठ सभी के सभी आराम फरमा रहे थे. इस बीच महिला काउंटर से पुरुष व पुरुष काउंटर पर बगल से महिलाओं को टिकट खरीदते देखा गया.
टिकट वापसी में होता है रुपये का खेल
टिकट कटने के तीन घंटे के भीतर उसे वापस करने का प्रावधान है. लेकिन काउंटर पर तैनात कर्मी रेलवे के सारे नियम-कानून को ताक पर रख मनमानी करते हैं. टिकट वापस करने के लिए पहुंचने वाले यात्रियों को लंबी लाइन में लगने के बाद गलत व झूठा झांसा देकर टालमटोल कर देते हैं. बाद में जब यात्री काउंटर के आसपास घूमने वाले बिचौलिये को पकड़ते हैं तो आनन-फानन में कुछ कमीशन लेकर काउंटर पर तैनात कर्मचारी टिकट की वापसी कर देते हैं. कुछ इसी तरह का आरोप बुधवार को पकड़े गये यात्रियों ने पुलिस के समक्ष दिये बयान में लगाया है.
