जीवन में सक्षम और सफल बनने के लिए शक्ति की आराधना अत्यंत प्रभावी : स्वामी गोविंद देव

पादुका दर्शन संन्यास पीठ में श्रीमद् देवी भागवत कथा जारी

मुंगेर. पादुका दर्शन संन्यास पीठ में श्रीमद् देवी भागवत कथा जारी है. इसके तीसरे दिन बुधवार को स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने देवी आराधना के अनेक सूक्ष्म और उपयोगी पक्षों को रखा. बीज मंत्रों की महिमा पर प्रकाश डाला. मौके पर बड़ी संख्या में देश-विदेश व स्थानीय श्रद्धालु मौजूद थे. स्वामी गोविंद देव ने कहा कि जीवन में सक्षम और सफल बनने के लिए शक्ति की आराधना अत्यंत प्रभावी है. वास्तव में शक्ति तत्व ही अंतिम सत्य है. जैसा कि देवी मां स्वयं कहती हैं कि मैं ही सब कुछ हूं, मेरे अलावा और कुछ भी शाश्वत और सनातन नहीं है. यहीं देवी भागवत का सार भी है. उन्होंने देवी के लोक, मणि द्वीप का विशद विवरण करते हुए कहा कि जहां तीनों देव ब्रह्मा, विष्णु और महेश उनके दर्शन के लिए जाते हैं. अमृत के सागर के बीच अवस्थित इस अत्यंत लावण्यमय द्वीप में असंख्य कल्पवृक्ष है. रत्नमयी बालू है और उस द्वीप में देवी मां भुवनेश्वरी के रूप में विराजमान है. उनकी महिमा और ऐश्वर्य ऐसी है कि त्रिदेवों ने उनके एक चरण के नख में संपूर्ण ब्रह्मांडों को देखा. देवी मां ने त्रिदेवों की आराधना से प्रसन्न होकर उन्हें अपना-अपना कार्य करने के लिए तीन शक्तियां प्रदान की. ब्रह्मा को देवी सरस्वती, विष्णु को देवी लक्ष्मी और शिव को देवी गौरी दी. इस प्रकार त्रिदेव देवी मां की कृपा और शक्ति प्राप्त कर सृष्टि के सृजन, पोषण और विनाश कार्यों में प्रवृत्त हुए. उन्होंने प्रवचन के दौरान बताया कि किस प्रकार सृष्टि तीन गुणों सत्, रजस और तमस पर आधारित है. साधना का लक्ष्य और प्रयोजन तमोगुण से सत्वगुण की ओर बढ़ना है. साधना से शक्ति का उपार्जन होता है. जिसे जीवन पर्यंत करने की आवश्यकता होती है. स्त्रोत पाठ और भजन-कीर्तन से युक्त यह कथा सुन कर श्रद्धालु गदगद हो गये.

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By BIRENDRA KUMAR SING

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