रफ्तार पर नहीं लग रहा ब्रेक : 40 माह में 295 लोगों की गई जान

यातायात नियमों का पालन सिर्फ कागजों तक सीमित

किसी का उजड़ा सुहाग तो कहीं अनाथ हुए बच्चे, फाइलों में सड़क सुरक्षा

मुंगेर. जिले की सड़कों पर मौत बेलगाम दौड़ रही है. हर गुजरते दिन के साथ सड़क हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब भी गहरी नींद में सोय है. पिछले 40 माह में सड़क दुर्घटनाओं में 295 लोगों की जान चली गई..इन हादसों ने किसी मां की गोद सूनी कर दी, तो कहीं घर का इकलौता चिराग बुझ गया. कई बच्चे अनाथ हो गए और कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बर्बाद हो गई, लेकिन प्रशासनिक फाइलों में यह सिर्फ आंकड़े बनकर रह गए हैं.

सड़क सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे, 40 माह में 295 मौत

मुंगेर की सड़कों पर हर दिन तेज रफ्तार, अव्यवस्थित यातायात और लापरवाही लोगों की जान ले रही है. शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक सड़क सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है. अगर 2023 से अब तक हुए दुर्घटनाओं पर गौर करें तो इस दौरान 457 सड़क दुर्घटना की घटनाएं प्रतिवेदित हुई. जिसमें 295 लोगों ने अपनी जान गंवाई और 305 लोग अपंगता के शिकार होकर दुखद जिंदगी जीने को विवश हैं. हादसों में मरने वालों में बड़ी संख्या युवाओं की है. कई परिवारों के कमाने वाले सदस्य असमय मौत के शिकार हो गए. जबकि एक सड़क दुर्घटना पूरे परिवार की आर्थिक रीढ़ तोड़ देती है, लेकिन सरकारी संवेदनाएं मुआवजे की घोषणा तक सीमित रह जाती हैं.

यातायात नियमों का पालन सिर्फ कागजों तक सीमित

सबसे दुखद पहलू यह है कि सड़क हादसों के बाद कुछ दिन तक प्रशासन सक्रिय दिखता है, बैठकें होती हैं, निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस बने रहते हैं. हाईवे, शहरी और ग्रामीण सड़कें आज भी बिना ट्रैफिक नियंत्रण के चल रही हैं. स्कूल और बाजार क्षेत्रों में भी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं. जिले में यातायात नियमों का पालन सिर्फ कागजों तक सीमित है. ओवरलोडिंग, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना, बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के सफर करना आम बात हो गई है. पुलिस कभी-कभार अभियान चलाकर खानापूर्ति कर देती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास नजर नहीं आते. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सड़क सुरक्षा के मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए, ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर सुधार किए जाएं और ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाया जाए, तो बड़ी संख्या में हादसों को रोका जा सकता है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर 295 मौतों के बाद भी जिम्मेदार विभाग क्यों नहीं जाग रहा?

फाइलों और बैठकों तक ही समिति है सड़क सुरक्षा समिति

सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन मुंगेर की हकीकत उन दावों की पोल खोल रही है. सड़कें मौत बांट रही हैं और प्रशासन सिर्फ आंकड़े गिनने में व्यस्त है. हद तो यह है कि सड़क सुरक्षा समिति है, नियमित बैठक होती है और सड़क दुर्घटना में कमी लाने के लिए नियम बनते है, एनएच, एसएच को दिशा निर्देश दिये जाते है. लेकिन उस पर अमल नहीं हो पाता है. अगर अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह संख्या और भयावह हो सकती है. आखिर कब तक लोगों की जान यूं ही सड़कों पर रौंदी जाती रहेगी?

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3.5 वर्ष में हुई मौत का आंकड़ा

वर्ष प्रतिवेदित कांड मृतक जख्मी

2023 143 95 167

2024 119 72 57

2025 148 95 60

2026 अब तक 47 33 21

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