तेजी से बढ़ रही गंगा, 19 घंटा में 45 सेंटीमीटर बढ़ा जलस्तर

गंगा के जलस्तर बढ़ने की रफ्तार प्रतिघंटा 2 सेंटीमीटर रही. मंगलवार की सुबह 6 बजे गंगा का जलस्तर 36.36 पर था.

मुंगेर

मुंगेर में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. मंगलवार को गंगा का जलस्तर 36.54 मीटर पर पहुंच गया. जो खतरे के निशान से मात्र 1.79 मीटर नीचे है. लेकिन गंगा का पानी अब दियारा क्षेत्र में फैलने लगा है. जिससे आने वाले समय में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है और दियारा क्षेत्र में बसे लोग दहशत में आ गये हैं.

वार्निंग लेबल से मात्र 1.79 नीचे बह रही गंगा

आपदा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार की रात 9 बजे गंगा का वाटर लेवल 36.9 मीटर पर था. जो मंगलवार को अपराह्न 4 बजे 36.54 पर पहुंच गया. यानी 19 घंटे में गंगा का जलस्तर 45 सेंटीमीटर बढ़ा है. मंगलवार को गंगा के जलस्तर बढ़ने की रफ्तार प्रतिघंटा 2 सेंटीमीटर रही. मंगलवार की सुबह 6 बजे गंगा का जलस्तर 36.36 पर था. जो अपराह्न 4 बजे 36.54 पर पहुंच चुका था. यानी मंगलवार को 9 धंटे में 18 सेंटीमीटर गंगा के जलस्तर में बढोतरी हुई है. आलम यह है कि वार्निंग लेबल 38.33 मीटर से मात्र 1.79 मीटर नीचे गंगा का जलस्तर है. वार्निंग लेबल पार करते ही जिले में बाढ़ की समस्या बिकराल होना शुरू हो जायेगा.

तेजी से गांव की ओर बढ़ रहा गंगा का पानी

गंगा के जलस्तर में बढोतरी होने के कारण उसका फैलाव भी शुरू हो गया है. तेजी से गंगा का पानी दियारा क्षेत्र बसे गांव की ओर बढ़ रही है. गंगा पानी दियारा क्षेत्र में तेजी से फैल रहा है. जिसके कारण गंगा किनारे दियारा के खेतों में लगे फसलों में पानी घूसने लगा है. हालांकि अभी बाढ़ आने की सिर्फ संभावना है. दियारा क्षेत्र के लोगों की माने तो इस बार भी बाढ़ आने की प्रवल संभावना है. क्योंकि गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. अगर इसी रफ्तार से गंगा का वाटर लेबल बढ़ता रहा तो पांच दिनों के अंदर मुंगेर में बाढ़ आ जायेगी.

बाढ़ से 38 पंचायत के 3.12 लाख की आबादी होती है प्रभावित

मुंगेर : जिले के छह प्रखंड मुंगेर सदर, बरियारपुर, धरहरा, जमालपुर, असरगंज एवं हवेली खड़गपुर बाढ़ से प्रभावित होते हैं. इन छह प्रखंडों के 38 पंचायत के 291 गांव बाढ़ ग्रस्त होते हैं. यहां निवास करने वाले 74 हजार से अधिक परिवार है. जिसकी आबादी 3.12 लाख है, जो बाढ़ से प्रभावित होती है. मुंगेर में बाढ़ का वार्निंग लेकर 38.33 मीटर है और खतरे का निशान 39.33 मीटर है. खतरे के निशान को जैसे ही पानी पार करता है, वैसे ही बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो जाती है.

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