कभी भी धराशायी हो सकता है किला का उत्तरी द्वार

जान जोखिम में डाल पार कर रहे लोग

जुगाड़ पर टिका है उत्तरी द्वार, टूट-टूट कर गिर रहा हिस्सा

मुंगेर. मुंगेर किला का उत्तरी द्वार कभी भी धराशायी हो सकता है. जुगाड़ पर टिके उत्तरी द्वार का हिस्सा टूट-टूट कर गिर रहा है. इसके बावजूद लोग जान जोखिम में डाल कर उत्तरी द्वार से आवाजाही कर रहे हैं. स्थानीय लाेगों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर से इसे अगर दुरुस्त नहीं किया जाता है, तो यह कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है.

ज्ञात हो कि ऐतिहासिक मुंगेर किला का उत्तरी द्वार बड़े वाहनों के धक्के से कमजोर हो गया था और जुलाई में इसका बड़ा हिस्सा टूट कर गिर गया था. लगातार किला के द्वार को बचाने के लिए उठ रही आवाज पर जिला प्रशासन की पहल पर भवन निर्माण विभाग द्वारा पूर्व निविदा के माध्यम से चयनित संवेदक की ओर से सात जुलाई को संवेदक द्वारा मरम्मत कार्य शुरू किया गया. इस दौरान जब मिस्त्री व मजदूर किला के ढहे हिस्से की सफाई करने लगे तो उसमें लगाया गया स्लैब गिरने लगा. कई बार प्रयास किया गया और हर बार स्लैब के गिरने का सिलसिला जारी रहा. इसके बाद भवन निर्माण विभाग की टीम ने किला के मरम्मत कार्य का निरीक्षण किया और मरम्मत कार्य को रोक दिया गया था. उसी समय से किला के उत्तरी द्वार का हिस्सा टूट-टूट गिरने से होने वाली दुर्घटना से बचने के लिए जुगाड़ पर मलवा रोकने का कार्य कराया गया, जो अब तक लगा हुआ है. आज भी इस होकर टोटो, मोटर साइकिल एवं पैदल राहगीर आवाजाही कर रहे हैं. अगर समय रहते इसका निदान नहीं निकला, तो यह ऐतिहासिक उत्तरी द्वार सिर्फ धराशायी ही नहीं होगा, बल्कि एक बड़े हादसे का कारण भी बन सकता है.

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By BIRENDRA KUMAR SING

BIRENDRA KUMAR SING is a contributor at Prabhat Khabar.

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