कृष्ण जन्म पर हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की… के लगे जयकारे

वासुदेव कृष्ण को गोकुल में माता यशोदा के पास पहुंचा देते हैं.

संग्रामपुर

प्रखंड के रतनपुरा गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्री श्री 1008 श्री विष्णु महायज्ञ के दूसरे दिन शुक्रवार को वृंदावन से आये रासलीला मंडली द्वारा श्री कृष्ण के जन्म की लीलाओं को धार्मिक नृत्य एवं नाटक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया.

कलाकारों ने कृष्ण लीला प्रस्तुत कर दिखाया कि कंस अपनी बहन देवकी का विवाह धूमधाम से करता है. देवकी को ससुराल ले जाते समय आकाशवाणी होती है कि देवकी का आठवां पुत्र उसका काल बनेगा. यह सुनकर कंस देवकी और बहनोई वासुदेव को कारागृह में डाल देता है. देवकी के सात बच्चों को कंस मार देता है, लेकिन आठवें पुत्र के रूप में भगवान कृष्ण के अवतार लेते ही कारागृह के ताले अपने आप खुल जाते हैं. मंचन के दौरान जब भगवान कृष्ण अवतरित होते हैं तो मां देवकी व बासुदेव के हाथों व पैरों में पड़ी बेड़ियां खुल जाती है. उसी समय आसमान से फूलों की बारिश होने लगती है और पूरा पंडाल हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गुंज उठता है. वासुदेव कृष्ण को गोकुल में माता यशोदा के पास पहुंचा देते हैं. इसके कुछ समय बाद कंस को कृष्ण जन्म के बारे में जानकारी मिलती है, तो वह कृष्ण को मारने के लिए अपनी बहन पूतना को भेजता है, लेकिन भगवान कृष्ण पूतना को मार देते हैं. रासलीला के दौरान कलाकारों ने कृष्ण भजन दया की दृष्टि मनमोहन अगर एक बार हो जाए, मैं इस संसार के जंजाल से उद्धार हो जाए… प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को खूब झुमाया. वहीं अयोध्या से पधारी कथावाचिका बंदना किशोरी ने भागवत कथा के महत्व के बारे में बताया. मौके पर ग्रामीण बलवीर सिंह, शिवमूर्ति सिंह, रोहित कुमार, संतोष कुमार, अमरजीत मंडल, संजीव कुमार, गब्बर कुमार, नेपाली मंडल, राजकुमार मंडल, धर्मेंद्र कुमार, मारखंडे कुमार सहित ग्रामवासी सहयोग कर रहे हैं.

2100 महिलाओं ने निकाली कलश शोभायात्रा, रुद्र महायज्ञ प्रारंभ

फोटो संख्या :फोटो कैप्शन : 10. कलश शोभायात्रा

बरियारपुर : प्रखंड के खड़िया गांव में 26 मई तक आयोजित होने वाले 11 दिवसीय श्री श्री 1008 रुद्र महायज्ञ को लेकर शुक्रवार को 2100 महिलाओं ने कलश शोभायात्रा निकाली. इसके साथ ही रुद्र महायज्ञ प्रारंभ हो गया. महिलाओं ने कलश लेकर जगशाला खड़िया से गांव का भ्रमण करते हुए दुर्गा स्थान गनगनिया तक गई. जहां पंडित ने मंत्रोच्चार के साथ संकल्प कराते हुए कलश में गंगाजल भरवाया. पुनः महिलाएं कलश लेकर वापस खड़िया गांव जगशाला पहुंची. वहीं गंगा किनारे संभावित दुर्घटना से बचाव को लेकर सीओ रवीना गुप्ता ने पांच गोताखोर की तैनाती कर रखी थी. इधर भीषण गर्मी को देखते हुए महायज्ञ में आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध पेयजल की परेशानी नहीं हो, इसके लिए करहरिया दक्षिणी पंचायत के मुखिया संजय कुमार सिंह द्वारा द्वारा प्याऊ की व्यवस्था की गई है. मुखिया ने कहा कि 11 दिवसीय रुद्र महायज्ञ में चित्रकूट से विष्णु दत्त जी महाराज, श्री बाल गोपाल रासलीला मंडली वृंदावन से पंडित मनीष कोशिक, साध्वी प्रियंका शास्त्री, उपवाचिका अंशिका दवी श्रद्धालुओं के मुख्य आकर्षण केंद्र होगी. यज्ञ को लेकर मीणा बाजार लगाया गया है. वहीं श्रद्धालुओं के लिए महाभंडारा की भी व्यवस्था की गई है. महायज्ञ को सफल बनाने में रीना कुमारी, पूजा रानी, रघुनंदन कुमार, वाल्मीकि कुमार, शालिग्राम सहित ग्रामीण सहयोग कर रहे हैं.

अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु : कृष्ण प्रिया

बरियारपुर : व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए, अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है. अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है. ये बातें कथावाचिका कृष्ण प्रिया ने प्रखंड के बरियारपुर बस्ती गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम महायज्ञ में श्रद्धालुओं से प्रवचन करते हुए कही. उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा. सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था. भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं. भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए. उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं. जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा.

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Published by: Anand kumar

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