हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा शिवगुरु धाम
Munger News : सुबह से हाथों में गंगाजल, बेलपत्र और दूध लेकर लंबी कतारों में खड़े श्रद्धालु, मंदिर परिसर में गूंजते “हर-हर महादेव” के जयकारे और भक्तिमय माहौल. सोमवार को शिवगुरू धाम में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला.
मुंगेर से राणा गौरी शंकर की रिपोर्ट : मुंगेर शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर सदर प्रखंड के मय दरियापुर स्थित शिवगुरू धाम में सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. भगवान शिव के प्रिय दिन सोमवार को जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा. पूरा मंदिर परिसर शिवभक्ति और आस्था से सराबोर दिखा.
जलाभिषेक के लिए लगी लंबी कतारें
सुबह मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचने लगे. भक्त हाथों में बेलपत्र, गंगाजल, दूध और फूल लेकर लंबी कतारों में खड़े नजर आये. मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से गूंजता रहा.श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सच्चे मन से की गयी पूजा भगवान शिव अवश्य स्वीकार करते हैं. यही वजह है कि स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
आस्था का प्रमुख केंद्र बना शिवगुरू धाम
मय दरियापुर स्थित शिवगुरू धाम लंबे समय से लोगों की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है. खासकर सोमवार और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य धार्मिक आयोजन होते हैं. मंदिर में पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है.श्रद्धालुओं का कहना है कि इस धाम में पूजा करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है.
महाशिवरात्रि में उमड़ता है श्रद्धा का महासंगम
महाशिवरात्रि के दौरान शिवगुरू धाम में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. खगड़िया, लखीसराय और बेगूसराय समेत कई जिलों से भक्त यहां जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं.विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों और आकर्षक रोशनी से सजाया जाता है. देर रात तक पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन चलता है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठता है.
आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है शिवगुरु धाम
मान्यता है कि यह धाम स्वामी अनुरागानन्द जी महाराज द्वारा स्थापित “शिव गुरु” की विचारधारा को समर्पित है. यहां शिव को केवल देवता नहीं, बल्कि परब्रह्म और परम चेतना ऊर्जा के रूप में समझाया जाता है.यह धाम न केवल आध्यात्मिक साधना का केंद्र है, बल्कि मुंगेर की प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को भी आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है.