बरियारपुर, मुंगेर से प्रतिनिधि की रिपोर्ट : रामायण काल से तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध पहाड़ की तराई में स्थित ऋषिकुंड में आयोजित होने वाला मलमास मेला इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है. प्रत्येक तीन वर्षों पर लगने वाला यह मेला 17 मई से शुरू होकर 16 जून तक चलेगा. मेले के आठ दिन बीत चुके हैं और प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है.
प्रतिदिन 15 हजार श्रद्धालु पहुंच रहे ऋषिकुंड
वर्तमान समय में प्रतिदिन करीब 15 हजार श्रद्धालु ऋषिकुंड पहुंच रहे हैं. मेला समाप्ति की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आएगी, श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. इसके साथ ही वाहनों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है.दो किलोमीटर तक लग रही वाहनों की कतार
मेला क्षेत्र में गाड़ियों की संख्या बढ़ने से पार्किंग स्थल भरने लगे हैं. स्थिति यह है कि पार्किंग फुल होने के बाद चारों दिशाओं में करीब दो किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग जा रही हैं. इससे मेले की लोकप्रियता और श्रद्धालुओं की आस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है.
पूजा सामग्री से लेकर खेल-तमाशे तक की दुकानें सजीं
ऋषिकुंड मेला परिसर में कई प्रकार की दुकानें सज चुकी हैं. यहां पूजा-पाठ सामग्री, मिठाई, नाश्ता और भोजनालय की दुकानें लोगों को आकर्षित कर रही हैं. इसके अलावा खेल-तमाशा और मनोरंजन से जुड़ी दुकानें भी लगाई जा रही हैं, जो मेले में आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगी.श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन अलर्ट
मलमास मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्था की गई है. महिला और पुरुषों के लिए 30 शौचालय बनाए गए हैं. पेयजल सुविधा के लिए दो प्याऊ स्थापित किए गए हैं, जबकि महिलाओं के लिए 10 चेंजिंग रूम बनाए गए हैं.
24 घंटे मेडिकल टीम और सुरक्षा व्यवस्था
मेले में बड़े-बड़े पंडाल लगाए गए हैं, जहां बिजली और पंखों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए 24 घंटे मेडिकल टीम तैनात की गई है. इसके अलावा मेला नियंत्रण कक्ष और चोर-उचक्कों पर नजर रखने के लिए विशेष गश्ती दल का गठन किया गया है.आस्था और उत्साह का केंद्र बना ऋषिकुंड
हर तीन वर्ष पर लगने वाला यह मलमास मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक मेलजोल का भी बड़ा केंद्र माना जाता है. आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन लगातार व्यवस्था को और मजबूत करने में जुटा हुआ है.
