मुंगेर में पद सरेंडर के फैसले के खिलाफ रेलकर्मियों का प्रदर्शन, गेट मीटिंग में उठी बड़ी मांग

Railway Protest in Jamalpur: 29 हजार से ज्यादा पद खत्म करने की तैयारी — रेलवे बोर्ड के फैसले के विरोध में जमालपुर कारखाना गेट पर गरजे रेलकर्मी

Railway Protest in Jamalpur: मुंगेर के जमालपुर से विजय कुमार गुप्ता की रिपोर्ट: भारतीय रेलवे में स्वीकृत पदों को सरेंडर करने के रेलवे बोर्ड के फैसले के विरोध में शुक्रवार को रेल इंजन कारखाना जमालपुर में रेलकर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन किया. पूर्वी रेलवे कर्मचारी संघ के बैनर तले कारखाना के गेट संख्या-1 पर आयोजित गेट मीटिंग में बड़ी संख्या में रेलकर्मी शामिल हुए. वक्ताओं ने रेलवे बोर्ड के निर्णय को कर्मचारी विरोधी बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की.

रेलवे बोर्ड के फैसले पर भड़के कर्मचारी

गेट मीटिंग को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय रेलवे मजदूर संघ के उपाध्यक्ष विष्णुकांत शर्मा ने कहा कि रेलवे बोर्ड ने वर्ष 2026-27 के दौरान भारतीय रेलवे में 29,608 स्वीकृत पदों को सरेंडर करने का आदेश जारी किया है. उन्होंने कहा कि यह संख्या कुल स्वीकृत पदों का लगभग दो प्रतिशत है.

उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार पदों में कटौती से रेलवे में कार्यरत कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा और यात्रियों की सुविधाएं भी प्रभावित होंगी.

देशभर में चल रहा विरोध अभियान

वक्ताओं ने कहा कि भारतीय रेलवे मजदूर संघ के आह्वान पर देशभर में इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. जमालपुर की गेट मीटिंग भी उसी अभियान का हिस्सा थी.

रेल नेताओं ने कहा कि रेलवे देश की जीवनरेखा है और यहां पदों को खत्म करने की बजाय रिक्त पदों पर बहाली होनी चाहिए. कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जायेगा.

कई वरिष्ठ रेल नेता रहे मौजूद

कार्यक्रम में पूर्वी रेलवे कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष विजय चौरसिया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे. वहीं अंबिका प्रसाद और भानु पाठक सहित कई वरिष्ठ रेलकर्मी नेताओं ने भी सभा को संबोधित किया.

वक्ताओं ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों के हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जायेगी. कर्मचारियों ने एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया.

रेलकर्मियों में बढ़ रही चिंता

रेलवे बोर्ड के फैसले के बाद रेलकर्मियों के बीच भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. कर्मचारियों का कहना है कि लगातार पदों में कटौती से कार्य व्यवस्था प्रभावित होगी और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी कई गुना बढ़ जायेगी.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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