– वक्ताओं ने कहा कटाव पीड़ित एकजुट होकर आवाज उठाएं, सरकार को स्थायी समाधान करना ही होगा मुंगेर सदर प्रखंड के टीकारामपुर पंचायत स्थित राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में रविवार को गंगा कटाव के स्थायी समाधान की मांग को लेकर जन आंदोलन के दूसरे चरण के तहत गंगा पूजन एवं एकदिवसीय उपवास कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी अनिल यादव ने की. जबकि संचालन रामपुर पंचायत के मुखिया कृष्णानंद यादव ने किया. उपवास शुरू होने से पहले हजारों महिलाओं ने गंगा तट पर पहुंचकर अगरबत्ती और फूल अर्पित करते हुए मां गंगा से कटाव से मुक्ति की प्रार्थना की. युवा शक्ति के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नागेंद्र सिंह त्यागी ने कहा कि गंगा कटाव के स्थायी समाधान के लिए वर्षों से संघर्ष करने वाले सभी आंदोलनकारियों को समाज कभी नहीं भूलेगा. उन्होंने कहा, यदि मुंगेर, खगड़िया और बेगूसराय के कटाव पीड़ित लोग एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें, तो कोई ताकत स्थायी समाधान होने से नहीं रोक सकती. भाजपा नेता ई. धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि दुनिया में कोई भी ऐसी समस्या नहीं है, जिसका समाधान जन आंदोलन से संभव न हो. उन्होंने दशरथ मांझी के संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि एक व्यक्ति पहाड़ काटकर रास्ता बना सकता है तो हजारों लोग मिलकर 12 किलोमीटर गंगा कटाव को रोकने का संकल्प भी पूरा कर सकते हैं. राजद नेता अविनाश कुमार विद्यार्थी उर्फ मुकेश यादव , कांग्रेस ओबीसी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार मंडल ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए इसे किसानों की जमीन और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था बचाने की लड़ाई बताया. आंदोलन के सहयोगी अनिल यादव ने कहा कि वर्ष 2008 से गंगा कटाव रोकने के लिए संघर्ष जारी है और भविष्य में भी यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक स्थायी समाधान नहीं हो जाता. कार्यक्रम के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कटाव पीड़ितों का प्रतिनिधिमंडल बिहार सरकार के समक्ष अपनी मांग रखेगा और आवश्यकता पड़ने पर जनप्रतिनिधियों के आवास पर भी चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा. मौके पर बड़ी संख्या में महिला-पुरुष मौजूद थे.
गंगा कटाव के स्थायी समाधान को लेकर जनसंकल्प, हजारों लोगों ने किया गंगा पूजन व उपवास
वर्ष 2008 से गंगा कटाव रोकने के लिए संघर्ष जारी है और भविष्य में भी यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक स्थायी समाधान नहीं हो जाता. कार्यक्रम के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कटाव पीड़ितों का प्रतिनिधिमंडल बिहार सरकार के समक्ष अपनी मांग रखेगा और आवश्यकता पड़ने पर जनप्रतिनिधियों के आवास पर भी चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा.
