मुंगेर से वीरेंद्र कुमार सिंह की रिपोर्ट. बुधवार की रात करीब 11:30 बजे आई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने जिले की विद्युत व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया. मौसम के बदलते ही शहर से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक बिजली आपूर्ति ठप हो गई, जिससे पूरा जिला रात भर अंधेरे में डूबा रहा.
मेंटेनेंस के नाम पर लाखों खर्च, फिर भी पहली आंधी में फेल
हैरानी की बात यह है कि हाल के दिनों में विद्युत विभाग ने मेंटेनेंस (रखरखाव) के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए थे. इस कार्य के लिए उपभोक्ताओं को लगातार तीन दिनों तक भारी बिजली कटौती का सामना करना पड़ा था, ताकि भविष्य में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके. लेकिन बुधवार रात की पहली ही तेज आंधी ने विभाग के इन तमाम दावों की पोल खोल दी.
रात भर परेशान रहे लोग, पानी की भी हुई किल्लत
बिजली गुल होने से लोगों को भीषण उमस और गर्मी में पूरी रात जागकर बितानी पड़ी. कई घरों में लगे इनवर्टर भी घंटों की कटौती के बाद जवाब दे गए. बिजली संकट का सीधा असर जलापूर्ति पर भी पड़ा, जिसके कारण गुरुवार की सुबह लोगों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा और दैनिक कार्यों में भारी परेशानी हुई.
ग्रामीण इलाकों में भारी नुकसान, तार हुए क्षतिग्रस्त
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर रही. तेज हवाओं के कारण कई जगहों पर पेड़ और भारी टहनियां बिजली के तारों पर गिर गईं, जिससे तार टूट गए और इंसुलेटर क्षतिग्रस्त हो गए. इस कारण आपूर्ति बहाल करने में बिजली कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी.
विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों ने विभाग की कार्यशैली पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है. लोगों का सवाल है कि यदि मेंटेनेंस के नाम पर इतनी बड़ी राशि और समय खर्च किया गया था, तो फिर मामूली आंधी में ही व्यवस्था क्यों ध्वस्त हो गई? उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन से इस मामले में जवाबदेही तय करने और विद्युत आपूर्ति का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है.
