Panchmukhi Nath Mahadev : पंचमुखी नाथ महादेव मंदिर हवेली खड़गपुर अनुमंडल क्षेत्र में नगर की दक्षिण-पूर्वी सीमा पर स्थित है. यहां विराजमान भगवान शिव के स्वरूप को पांच मुख और बदन वाला माना जाता है. इसी वजह से इन्हें पंचमुखी नाथ और पंचवदन महादेव कहा जाता है. स्थानीय क्षेत्र में बाबा की ख्याति काफी अधिक है. आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों के साथ-साथ दूर-दराज के श्रद्धालु भी नियमित रूप से यहां पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं.
मनोकामना पूरी होने का विश्वास बनाता है खास
पंचमुखी नाथ महादेव को मनोकामना पूर्ण करने वाले भोलेनाथ के रूप में श्रद्धालु पूजते हैं. यही विश्वास मंदिर को सालों भर भक्तों से जोड़े रखता है. सोमवार, प्रदोष और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है. सावन के महीने में मंदिर की रौनक देखते ही बनती है और बड़ी संख्या में शिवभक्त बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर करते हैं जलाभिषेक
सावन में पंचमुखी नाथ महादेव मंदिर की धार्मिक गतिविधियां और बढ़ जाती हैं. श्रद्धालु सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से गंगाजल भरकर कांवर के साथ खड़गपुर पहुंचते हैं. इसके बाद बाबा पंचमुखी नाथ का जलाभिषेक करते हैं. इस दौरान मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गूंज उठता है.
‘लघु देवघर’ के नाम से भी है पहचान
सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाने की परंपरा और सावन में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण पंचमुखी नाथ मंदिर को स्थानीय लोग ‘लघु देवघर’ भी कहते हैं. धार्मिक आस्था, प्राचीन मान्यताओं और शिवभक्ति की परंपरा ने इस मंदिर को मुंगेर की महत्वपूर्ण धार्मिक धरोहरों में विशेष स्थान दिलाया है.
