मृत्यु के समय मनुष्य को पवित्रता का भाव रखना चाहिए : विष्णु दत्त

विष्णुदत्त जी महाराज ने विष्णु पुरान में वर्णित राजा जड़भरत एवं प्रह्लाद की कथा सुनाते हुए कहा कि मृत्यु के समय मनुष्य को अपने में पवित्रता का भाव रखना चाहिए.

बरियारपुर. चित्रकूट से पधारे विष्णुदत्त जी महाराज ने विष्णु पुरान में वर्णित राजा जड़भरत एवं प्रह्लाद की कथा सुनाते हुए कहा कि मृत्यु के समय मनुष्य को अपने में पवित्रता का भाव रखना चाहिए. वे शनिवार को प्रखंड के खड़िया गांव में आयोजित 11 दिवसीय रुद्र महायज्ञ में श्रद्धालुओं को प्रवचन करते हुए कही. महाराज ने कहा कि विष्णु पुराण में वर्णित विभिन्न कथाओं में राजा जड़भरत और प्रह्लाद की कथाएं उल्लेखनीय है. उन्होंने कहा कि जड़भरत की कहानी यह दर्शाती है कि मृत्यु के समय व्यक्ति के मन में जो भाव होता है, उसी के अनुसार उसका अगला जन्म होता है. राजा जड़भरत की कथा यह सिखाती है कि मनुष्य को मृत्यु के समय अपने मन को पवित्र रखना चाहिए और भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहना चाहिए, ताकि अगला जन्म श्रेष्ठ हो सके. प्रह्लाद की कथा विष्णु की भक्ति और उनके पिता हिरण्य कश्यप के अत्याचार को दर्शाती है. जिसमें अंततः प्रह्लाद को विष्णु द्वारा बचाया जाता है. विष्णु पुराण में ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, वर्ण व्यवस्था, आश्रम व्यवस्था, भगवान विष्णु की सर्वव्यापकता, और कई राजाओं की जीवन गाथाएं वर्णित है. प्रह्लाद की कथा भगवान विष्णु की भक्ति और उनके भक्तों की रक्षा करने की शक्ति को दर्शाती है. हिरण्य कश्यप जो भगवान विष्णु का घोर विरोधी था और प्रह्लाद को विष्णु की भक्ति से दूर करना चाहता था, लेकिन प्रह्लाद ने अपने पिता के सभी प्रयासों के बावजूद अपनी भक्ति को नहीं छोड़ा. अंततः विष्णु ने नरसिंह रूप में प्रकट होकर हिरण्य कश्यप का वध कर प्रह्लाद की रक्षा की. कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने रासलीला का भी आनंद उठाया. अंत में अतिथियों को मुखिया संजय कुमार सिंह ने अंग-वस्त्र देकर सम्मानित किया.

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By ANAND KUMAR

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