मुंगेर में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की रफ्तार सुस्त
मुंगेर. प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर पैनल लगाने पर सरकार 30 से 78 हजार रुपये तक की भारी सब्सिडी दे रही है. इसके बावजूद मुंगेर जिले में इस महत्वाकांक्षी योजना का बुरा हाल है. शहरी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक सोलर पैनल लगाने की रफ्तार बेहद सुस्त है. हालात यह है कि जिले भर में अब तक सिर्फ 207 सोलर पैनल का ही इंस्टॉलेशन किया जा सका है, जो योजना की जमीनी हकीकत को बयां कर रही है. इसमें भी चौंकाने वाली बात यह है कि मुंगेर व जमालपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में मात्र 79 लोगों ने ही इस योजना का लाभ लिया है.
लक्ष्य से कोसों दूर, दो साल में केवल 723 आवेदन
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की शुरुआत 15 फरवरी 2024 को हुई थी. इसे शुरू हुए दो वर्ष का समय बीत चुका है, लेकिन जिले में उपलब्धि नगण्य है. विद्युत विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इन दो वर्षों में जिले के मात्र 723 लोगों ने पोर्टल पर आवेदन किया है. इसमें से केवल 207 घरों में पैनल लग पाए हैं. ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति शहरी इलाकों से थोड़ी बेहतर है, जहां 128 घरों में पैनल लगे हैं, जबकि मुंगेर व जमालपुर शहर में यह आंकड़ा महज 79 पर सिमट गया है. विभाग को मार्च तक 361 इंस्टॉलेशन का टारगेट दिया गया है, जिसे पूरा करना एक बड़ी चुनौती नजर आ रही है.
प्रचार-प्रसार की कमी व जागरूकता का अभाव
यह एक महत्वपूर्ण सरकारी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य घरों को सौर ऊर्जा से जोड़कर बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है. योजना के तहत उपभोक्ताओं को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी. अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर पैसा कमाने का भी अवसर है. सरकार इस पर भारी सब्सिडी भी दे रही है, लेकिन जागरूकता व व्यापक प्रचार-प्रसार के अभाव में मुंगेर में यह योजना रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है. आम लोगों तक योजना के फायदों की जानकारी सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही है.
जेब से पैसे लगाने की मजबूरी बनी बड़ी बाधा
योजना की धीमी रफ्तार का एक बड़ा कारण इसकी लागत और भुगतान की प्रक्रिया है. सोलर पैनल लगाने में 50 हजार से लेकर 1.50 लाख रुपये तक का खर्च आता है. 1 किलोवाट के लिए 50 से 60 हजार रुपये की लागत (सब्सिडी: 30 हजार). दो किलोवाट: 1.10 लाख रुपये की लागत (सब्सिडी: 60 हजार). तीन किलोवाट के लिए 1.25 से 1.50 लाख रुपये की लागत (सब्सिडी: 78 हजार). समस्या यह है कि यह पूरी राशि उपभोक्ता को पहले खुद लगानी पड़ती है. सोलर पैनल लगने के बाद जब बिजली विभाग के अधिकारी (जेई या एई) वेरिफिकेशन करते हैं, तब जाकर सब्सिडी की राशि लाभुक के खाते में आती है. मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एकमुश्त इतनी बड़ी राशि खर्च करना मुश्किल हो रहा है.
आवेदन की प्रक्रिया और कार्यपालक अभियंता की अपील
योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन करना होता है. आवेदन के दौरान एजेंसी का चयन करना पड़ता है, जो इंस्टॉलेशन का काम करती है. कार्यपालक अभियंता धीरेंद्र कुमार ने बताया कि विभाग लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है. उन्होंने स्वीकार किया कि पहले खुद का पैसा लगाने की अनिवार्यता के कारण लोग हिचकिचा रहे हैं. उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि यह योजना दीर्घकालिक लाभ देने वाली है, इसलिए लोग आगे आएं व इसका लाभ उठाएं.