समर्थ पोर्टल के लिये अब बेल्ट्रॉन से मिलेंगे डाटा ऑपरेटर

विश्वविद्यालय और कॉलेजों को डाटा ऑपरेटर दिये जायेंगे. जिससे विश्वविद्यालयों को निजी एजेंसी पर प्रत्येक माह लाखों रूपये खर्च करने से राहत मिलेगी.

मुंगेर

राजभवन के निर्देश पर अब सूबे के सभी विश्वविद्यालयों में नामांकन सहित सभी शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक प्रक्रियाएं समर्थ पोर्टल पर कर दिया है. जिसके तहत अब मुंगेर विश्वविद्यालय सहित सभी विश्वविद्यालयों द्वारा नये सत्र में नामांकन की प्रक्रिया भी समर्थ पोर्टल पर आरंभ कर दी गयी है. जिसके लिये अब बेल्ट्रॉन एजेंसी से ही सभी विश्वविद्यालय और कॉलेजों को डाटा ऑपरेटर दिये जायेंगे. जिससे विश्वविद्यालयों को निजी एजेंसी पर प्रत्येक माह लाखों रूपये खर्च करने से राहत मिलेगी. इसके लिये कुलाधिपति के निर्देश पर राज्यपाल सचिवालय द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी की गयी है. राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालयों में डिजिटल प्रशासन एवं पारदर्शी शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिये समर्थ पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रयास किया जा रहा है. पूर्व में यूएमआईएस प्रणाली के संचालन में विद्यालयों को निजी एजेंसी को करोड़ों रूपये का भुगतान करना पड़ता था, जबकि समर्थ पोर्टल के क्रियान्वयन में किसी प्रकार का सॉफ्टवेयर शुल्क विश्वविद्यालय को नहीं लगेगा. इससे होने वाली बचत का उपयोग विश्वविद्यालय तकनीकी संसाधानों एवं डिजिटल अवसंरचनाओं को सुदृढ़ करने के लिये करेंगे. इसके तहत समर्थ पोर्टल संचालन के लिये बेल्ट्रॉन के माध्यम से सभी विश्वविद्यालय व उनके कॉलेजों के लिये 323 कंप्यूटर ऑपरेटर उपलब्ध कराने तथा प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिये एक अतिरिक्त प्रोग्रामर रखने की स्वीकृति दी गयी है.

निजी एजेंसियों पर निर्भरता होगी समाप्त

समर्थ पोर्टल के क्रियान्वयन से मुंगेर विश्वविद्यालय सहित उसके विद्यार्थियों के लिये निजी एजेंसियों पर निर्भरता समाप्त हो जायेगी. विदित हो कि एमयू के अबतक के 8 साल के कार्यकाल में सबसे अधिक परेशानी विद्यार्थियों के लिये यूएमआईएस पोर्टल में आये दिन होने वाली तकनीकी खराबी और बार-बार एजेंसी बदलने से होती है. हाल में ही यूएमआईएस एजेंसी बदले जाने से एमयू के विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक प्रक्रियाओं को पूरी करने में परेशानियों का सामना करना पड़ा है. ऐसे में अब सरकार से समर्थ पोर्टल संचालन के लिये डाटा ऑपरेटर मिलने से न केवल विश्वविद्यालय को प्रत्येक साल करोड़ों रूपये निजी एजेंसियों पर खर्च करने से बचायेगी, बल्कि विद्यार्थियों को भी पोर्टल की समस्याओं से राहत मिलेगी.

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Author: AMIT JHA

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