आयुक्त न्यायालय के आदेश पर नहीं हो रही कार्रवाई, अब जनता दरबार में दौड़ लगा रहे पीड़ित

आम जनता की समस्याओं के निराकरण को लेकर सरकार ने कई स्तर पर व्यवस्था की है और अब तो राज्य सरकार ने सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान की व्यवस्था भी कायम की है.

मुंगेर. आम जनता की समस्याओं के निराकरण को लेकर सरकार ने कई स्तर पर व्यवस्था की है और अब तो राज्य सरकार ने सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान की व्यवस्था भी कायम की है. जिसमें हर जिम्मेदार पदाधिकारी को सप्ताह में दो दिन जनता की समस्याओं के निराकरण की जिम्मेदारी दी गयी है. बावजूद लोगों की समस्याएं कागजी फाइलों में ही दौड़ती नजर आ रही और मूल समस्या यथावत रह रहे. मुंगेर प्रमंडल के आयुक्त के न्यायालय ने बीएलडीआर अपील संख्या 83/2023 शंभू कुमार बनाम पप्पू यादव एवं अन्य के मामले में 31 मई 2024 को जो आदेश दिया था. उसपर मुंगेर जिले के अधिकारी लगभग 22 माह बाद भी कार्रवाई नहीं कर रहे. हाल यह है कि अब अपीलार्थी आयुक्त से लेकर जिलाधिकारी, अपर समाहर्ता एवं डीसीएलआर के दरबार में दौर लगा रहे और हर अधिकारी अपने अधिनस्थ निचले अधिकारी को सिर्फ आदेश फॉरवर्ड कर रहे. विदित हो कि आयुक्त न्यायालय में उक्त मामले में मुंगेर सदर के डीसीएलआर को यह निर्देश दिया था कि बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम 2009 की धारा 4(1) (घ) में वर्णित प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करते हुए भूमि पर दखल कब्जा दिलायें. इतना ही नहीं इस मामले में बिहार लैंड टर्मिनल पटना ने भी कार्रवाई का आदेश दिया, लेकिन आयुक्त न्यायालय के आदेश पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही. न्यायालय के आदेश पर कार्रवाई को लेकर मुंगेर मुफस्सिल थाना क्षेत्र के शंकरपुर निवासी शंभू कुमार जहां 30 जनवरी को प्रमंडलीय आयुक्त तथा 3 फरवरी को जिलाधिकारी के जनता दरबार में गुहार लगाये और कार्रवाई की मांग की. वहीं इन वरीय पदाधिकारियों द्वारा निचले अधिकारियों को सिर्फ निर्देश ही दिये जा रहे हैं. आयुक्त ने जिलाधिकारी को, जिलाधिकारी ने अपर समाहर्ता को और अपर समाहर्ता ने मुंगेर सदर के डीसीएलआर को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया, किंतु नतीजा शून्य है. बताया जाता है कि अधिकांश जनता दरबार में आने वाले मामले सिर्फ फाइलों में दौड़ रहे हैं और सरकार के सबका सम्मान, जीवन आसान का नारा धरातल पर कारगर साबित नहीं हो पा रहा.

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Author: AMIT JHA

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