आज हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा मुंगेर का शिवगुरु धाम
Munger News : मुंगेर शहर से लगभग पांच किलोमीटर दूर सदर प्रखंड के मय दरियापुर स्थित शिवगुरू धाम में सोमवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. भगवान शिव का प्रिय दिन होने के कारण बड़ी संख्या में भक्त जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे. बेलपत्र, गंगाजल, दूध और फूल लेकर श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर बाबा भोलेनाथ के दर्शन करते नजर आये. पूरे दिन मंदिर परिसर शिवभक्ति और आस्था के रंग में रंगा रहा.
मुंगेर से राणा गौरी शंकर की रिपोर्ट
Munger News : मुंगेर के मय दरियापुर स्थित शिवगुरू धाम लंबे समय से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों से भी बड़ी संख्या में भक्त पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. सोमवार और शिवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर मंदिर का नजारा और भी भव्य हो जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गयी प्रार्थना भगवान शिव अवश्य स्वीकार करते हैं. यही वजह है कि हर वर्ग और हर उम्र के लोग बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं.
महाशिवरात्रि में उमड़ते है हजारों श्रद्धालु
शिवगुरू धाम में महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धा का महासंगम देखने को मिलता है. खगड़िया, लखीसराय, बेगूसराय समेत कई जिलों से हजारों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. मंदिर परिसर घंटों, शंखनाद और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठता है. विशेष अवसरों पर मंदिर को आकर्षक रोशनी और फूलों से सजाया जाता है. देर रात तक भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का दौर चलता रहता है, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है.
परम चेतना के रूप में पूजे जाते हैं शिव
आध्यात्मिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध शिवगुरू धाम स्वामी अनुरागानन्द जी महाराज द्वारा स्थापित ”शिव गुरु” की विचारधारा को समर्पित माना जाता है. यहां शिव को गुरु मानकर मानव जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन लाने का संदेश दिया जाता है. यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय चेतना और आध्यात्मिक ज्ञान का केंद्र भी है. यहां शिव को केवल देवता के रूप में नहीं, बल्कि परब्रह्म, अव्यक्त प्रकृति और परम चैतन्य ऊर्जा के स्वरूप में समझाया जाता है.
प्राचीन संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को संजोये हुए है शिवगुरु धाम
शिवगुरू धाम मुंगेर की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह धाम लोगों को धर्म, आध्यात्म और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. साथ ही छठ पूजा सहित विभिन्न धार्मिक पर्वों से जुड़े आध्यात्मिक मूल्यों को संरक्षित और प्रचारित करने का कार्य भी करता है. यही कारण है कि यह स्थान आज हजारों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.