PPO अपडेट और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 23.43 लाख ठगे, सवाल- कौन पहुंचा रहा डाटा?

Munger News: बिहार में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहा है. ठग नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं. ताजा मामला मुंगेर से सामने आया है. यहां पेंशन बंद होने का डर दिखाकर रिटायर्ड रेलकर्मियों से लाखों रुपये की ठगी कर ली गई.

Munger News: साइबर ठग कब, कैसे और किस रूप में अपना शिकार बना लें, इसका अंदाजा लगाना अब आम लोगों के लिए बेहद मुश्किल हो गया है. खासकर हाल ही में रिटायर हुए सरकारी कर्मचारी इन ठगों के आसान निशाने बनते जा रहे हैं. ताजा मामला मुंगेर से सामने आया है, जहां दो रिटायर्ड रेलकर्मियों को पेंशन प्रभावित होने का डर दिखाकर पीपीओ बुक अपडेट कराने के नाम पर कुल 23 लाख 43 हजार रुपये की ठगी कर ली गयी. रिटायर होने पर मिली एकमुश्त राशि लुट जाने से दोनों पीड़ित रेलकर्मी सदमे में हैं. पीड़ितों ने साइबर थाना में लिखित शिकायत देकर राशि वापस दिलाने की गुहार लगायी है.

डिजिटल अरेस्ट कर एक दिन में उड़ाये लाखों रुपये

जमालपुर निवासी रेलकर्मी मनोज कुमार 30 अगस्त 2025 को रिटायर हुए थे. रिटायर होने के बाद उन्हें रेलवे की ओर से लाखों रुपये का भुगतान मिला था, जो उनके एसबीआई खाते में जमा था. 18 दिसंबर को उनके व्हाट्सएप पर एक पीपीओ फॉर्म आया. इसके बाद फोन कर खुद को रेलवे विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा गया कि यदि पीपीओ फॉर्म नहीं भरा गया तो उनकी पेंशन बंद हो जायेगी.

ठगों की बातों में आकर रेलकर्मी ने उनके निर्देशों का पालन किया. साइबर ठगों ने उनसे यूपीआइ आइडी डाउनलोड करवाई और पीपीओ फॉर्म अपडेट कराने के नाम पर मोबाइल पर आने वाले ओटीपी की जानकारी हासिल कर ली. इसके बाद एक ही दिन में 11 अलग-अलग ट्रांजेक्शन कर उनके खाते से 22 लाख 55 हजार रुपये निकाल लिये गये.

इसी तरह 18 दिसंबर 2025 को एक अन्य रिटायर्ड रेलकर्मी गजेंद्र साह को भी पीपीओ बुक भरने के नाम पर ठगी का शिकार बनाया गया. ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाया और फिर बैंक ऑफ बड़ौदा तथा एसबीआइ जमालपुर शाखा के खातों से कुल 88 हजार 196 रुपये उड़ा लिये. गनीमत रही कि उनके खाते में बड़ी रकम नहीं थी, जिससे नुकसान सीमित रह गया.

ठगों तक कैसे पहुंच रहा रिटायर्ड रेलकर्मियों का डाटा

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि साइबर ठगों के पास हालिया सेवानिवृत्त रेलकर्मियों की पूरी जानकारी आखिर पहुंच कैसे रही है. सूत्रों के अनुसार, कई स्तरों पर मिलीभगत के जरिए ठगों को रिटायर्ड कर्मियों का डाटा उपलब्ध कराया जा रहा है. विभागीय स्तर से डाटा लीक होने की आशंका भी जतायी जा रही है.

ठग पेंशन बंद होने और पीपीओ फॉर्म मोबाइल नंबर पर भेजने का झांसा देकर रिटायर्ड कर्मियों को फंसाते हैं. फिर उनकी जीवन भर की जमा पूंजी खाते से उड़ा लेते हैं. हैरानी की बात यह है कि एक ही दिन में 4.99 लाख रुपये की कई बार ट्रांजेक्शन होने के बावजूद बैंक स्तर पर कोई सतर्कता या रोक-टोक नहीं की गयी.

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क्या बोले डीएसपी

डीएसपी राकेश रंजन ने बताया कि साइबर ठग इन दिनों रिटायर्ड रेलकर्मियों को पेंशन बंद होने का भय दिखाकर ठगी कर रहे हैं. पीड़ितों के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है. साइबर थाना पुलिस मामले की गहन छानबीन कर रही है.

उन्होंने रिटायर होने वाले सभी कर्मचारियों से अपील की है कि किसी भी तरह की जानकारी केवल विभागीय कार्यालय से ही प्राप्त करें. व्हाट्सएप या फोन पर आने वाले संदिग्ध मैसेज और कॉल को नजरअंदाज करें. किसी को भी ओटीपी, बैंक डिटेल या यूपीआइ संबंधी जानकारी साझा न करें.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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