लाखों की मरम्मत के बाद भी नहीं सुधरा मुंगेर का विद्युत शवदाहगृह, चार जिलों के लोगों की बढ़ी मुश्किल

लाखों की मरम्मत के बाद भी मुंगेर का विद्युत शवदाहगृह बंद पड़ा है, जिससे अंतिम संस्कार करने में लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. गंगा का बढ़ता जलस्तर और बारिश के बीच खुले में दाह संस्कार करना न केवल असुविधाजनक है, बल्कि जोखिम भरा भी है.

Munger News : मुंगेर में किसी परिवार के लिए अंतिम संस्कार का समय पहले ही बेहद कठिन होता है. ऐसे में अगर शव का अं तिम संस्कार करने की व्यवस्था ही बंद मिले तो परेशानी और बढ़ जाती है. मुंगेर शहर के लाल दरवाजा श्मशान घाट स्थित विद्युत शवदाहगृह इन दिनों इसी स्थिति से गुजर रहा है. बताया जाता है कि 5 अगस्त से शवदाहगृह में लगा पंखा खराब है और इसके कारण विद्युत शवदाह की सुविधा बंद पड़ी है.

इसका सीधा असर मृतकों के परिजनों पर पड़ रहा है. उन्हें मजबूरी में खुले श्मशान घाट में शव का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है. खासकर गंगा के बढ़ते जलस्तर और बारिश के बीच खुले में दाह संस्कार करना लोगों के लिए परेशानी के साथ जोखिम भी बढ़ा रहा है.

लाखों खर्च के बाद जनवरी में हुआ था चालू

विद्युत शवदाहगृह को चालू रखने के लिए नगर निगम की ओर से लाखों रुपये खर्च कर इसकी मरम्मत करायी गयी थी. इसके बाद जनवरी 2026 में इसे दोबारा शुरू किया गया.

लेकिन कुछ ही महीनों बाद इसके फिर खराब हो जाने से अब इसके रखरखाव और तकनीकी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्युत शवदाहगृह का बार-बार खराब होना नई बात नहीं है. साल में कई महीने यह किसी न किसी तकनीकी समस्या के कारण बंद रहता है.

लोगों का कहना है कि जब शवदाहगृह चालू रहता है तो अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सुविधाजनक हो जाती है. लेकिन खराब होते ही लोगों को फिर खुले श्मशान घाट पर निर्भर होना पड़ता है.

गंगा का बढ़ता जलस्तर बढ़ा रहा परेशानी

इन दिनों गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है. नदी किनारे स्थित लाल दरवाजा श्मशान घाट पर इसका असर भी दिखाई देने लगा है.

जलस्तर बढ़ने के कारण अंतिम संस्कार के लिए उपलब्ध जगह प्रभावित हो रही है. बारिश के बीच खुले स्थान पर शव का अंतिम संस्कार करना मृतकों के परिजनों के लिए मुश्किल हो रहा है.

ऐसे समय में विद्युत शवदाहगृह का बंद होना समस्या को और गंभीर बना रहा है. लोगों का कहना है कि यदि विद्युत शवदाहगृह चालू रहता तो कई परिवारों को मौसम और बढ़ते जलस्तर से जुड़ी परेशानियों से राहत मिल सकती थी.

साल में छह से आठ महीने खराब रहने का दावा

स्थानीय शहरवासियों का आरोप है कि विद्युत शवदाहगृह साल में करीब छह से आठ महीने किसी न किसी कारण से खराब रहता है. इससे उस उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसके लिए इसे स्थापित किया गया था.

लोगों का कहना है कि बार-बार खराब होने के पीछे तकनीकी समस्या के साथ-साथ नियमित रखरखाव का अभाव भी एक कारण हो सकता है. हालांकि, इसकी वास्तविक वजह संबंधित विभाग की तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी.

खुले में अंतिम संस्कार से गंगा प्रदूषण की चिंता

विद्युत शवदाहगृह के बंद रहने का असर सिर्फ मृतकों के परिजनों की सुविधा तक सीमित नहीं है. स्थानीय लोगों को गंगा के प्रदूषण की भी चिंता सता रही है.

लोगों के अनुसार, शवदाहगृह बंद होने के कारण खुले में दाह संस्कार करना पड़ता है. ऐसे में नदी के किनारे होने वाले अंतिम संस्कार से गंगा में प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है.

शहरवासियों ने नगर निगम से मांग की है कि शवदाहगृह की खराबी को तत्काल दूर कराया जाए और इसे नियमित रूप से चालू रखने की व्यवस्था की जाए.

चार जिलों के लोग होते हैं निर्भर

मुंगेर का विद्युत शवदाहगृह सिर्फ शहर या जिले के लोगों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है. यहां मुंगेर के अलावा जमुई, शेखपुरा और लखीसराय जिले से भी लोग शवों का अंतिम संस्कार कराने पहुंचते हैं.

ऐसे में शवदाहगृह के बंद रहने से चार जिलों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्हें खुले श्मशान घाट पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि तकनीकी खराबी को दूर कराने को लेकर सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की ओर से भी लगातार आवाज उठायी जाती रही है. समाचार पत्रों के माध्यम से भी नगर निगम प्रशासन का ध्यान इस समस्या की ओर आकृष्ट कराया गया है.

इसके बावजूद शवदाहगृह के नियमित संचालन की समस्या अब तक दूर नहीं हुई है.

पार्षद ने नगर निगम को दी जानकारी

नगर निगम के वार्ड संख्या एक की पार्षद अंशुवाला ने भी विद्युत शवदाहगृह की स्थिति को लेकर चिंता जतायी है.

उन्होंने कहा कि विद्युत शवदाहगृह अधिकांश समय खराब ही रहता है. जनवरी में इसकी मरम्मत करायी गयी थी, लेकिन इसके बाद यह फिर खराब हो गया.

पार्षद ने बताया कि उन्होंने नगर निगम प्रशासन को इसकी जानकारी दी है और जल्द से जल्द खराबी दूर कर शवदाहगृह को चालू कराने की मांग की है.

Munger News: अब मरम्मत और नियमित रखरखाव की जरूरत

बार-बार खराब हो रहा विद्युत शवदाहगृह अब सिर्फ एक तकनीकी समस्या नहीं रह गया है. इसका सीधा संबंध उन परिवारों से है, जो अपने प्रियजन के अंतिम संस्कार के लिए इस सुविधा पर निर्भर हैं.

गंगा का बढ़ता जलस्तर और बारिश की स्थिति को देखते हुए समस्या और गंभीर हो गयी है. ऐसे में लोगों की मांग है कि नगर निगम सिर्फ खराबी दूर करने तक सीमित न रहे, बल्कि नियमित रखरखाव की स्थायी व्यवस्था भी करे.

अब देखना यह है कि नगर निगम प्रशासन कितनी जल्दी तकनीकी खराबी दूर कर विद्युत शवदाहगृह को दोबारा चालू कराता है.

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By Birendra Kumar Sing

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