मुंगेर. मुंगेर में गंगा ने रौद्र रूप धारण कर लिया है. सोमवार की शाम केंद्रीय जल आयोग ने गंगा का जलस्तर 40.12 मीटर दर्ज किया. यह पिछले 10 वर्षों में दर्ज अधिकतम जलस्तर 40.07 मीटर के रिकॉर्ड को पार कर गया है. वर्ष 2016 में गंगा का अधिकतम जलस्तर 40.07 मीटर दर्ज किया गया था, जबकि मुंगेर में डेंजर लेबल 39.33 मीटर है. इस लिहाज से नदी का पानी खतरे के निशान से 79 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है. जलस्तर बढ़ने के साथ बाढ़ का पानी तेजी से नये इलाकों में फैल रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी इलाके भी इसकी चपेट में आने लगे हैं.
वर्ष 2016 का रिकॉर्ड भी टूटा
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 में 26 अगस्त को मुंगेर में गंगा का जलस्तर 40.07 मीटर दर्ज किया गया था. यह डेंजर लेबल से 74 सेंटीमीटर ऊपर था. अब जलस्तर 40.12 मीटर पहुंचने से वर्ष 2016 का रिकॉर्ड भी टूट गया है. मौजूदा जलस्तर पुराने रिकॉर्ड से पांच सेंटीमीटर अधिक है.
हालांकि इलाहाबाद, वाराणसी और पटना में गंगा के जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज होने की बात कही जा रही है. ऐसे में संभावना जतायी जा रही है कि मंगलवार से मुंगेर में भी जलस्तर में गिरावट शुरू हो सकती है. फिलहाल नदी का जलस्तर करीब आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है.
बड़ी संख्या में बाढ़पीड़ित अब भी राहत के इंतजार में
दियारा क्षेत्र में बाढ़ की त्रासदी सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है. प्रशासन की ओर से बनाये गये राहत शिविरों में बड़ी संख्या में लोग शरण लिये हुए हैं. वहीं कई परिवार सड़क किनारे पॉलीथिन शीट और तिरपाल लगाकर मवेशियों के साथ रहने को मजबूर हैं.
दियारा क्षेत्र के कई गांवों में लोग अब भी बाढ़ के बीच फंसे हुए हैं और घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं. कोई मचान पर तो कोई छत पर शरण लिये हुए है. कई परिवार ईंटों के चबूतरे पर चारपाई या तख्ती रखकर किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं. घरों में कई दिनों से पानी भरा रहने के कारण चूल्हा नहीं जल पा रहा है. अनाज रहने के बावजूद खाना पकाना संभव नहीं है. मूढ़ी, चूड़ा और दालमोट जैसी खाद्य सामग्री भी खत्म होने के कगार पर है. ऐसे में प्रभावित परिवार प्रशासनिक राहत का इंतजार कर रहे हैं.
गांव से लेकर शहर तक पानी ही पानी
दियारा क्षेत्र के बाद गंगा के तटवर्ती करारी इलाकों में भी बाढ़ का असर बढ़ता जा रहा है. मिर्जापुर बरदह, मय, नौवागढ़ी दक्षिणी, नौवागढ़ी उत्तरी, कटरिया सहित कई क्षेत्रों के गांवों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है.
सीताकुंड डीह गांव पूरी तरह जलमग्न हो गया है और सड़कों पर दो से ढाई फीट तक पानी जमा है. चंडिकास्थान के समीप टीकारामपुर गांव भी पानी से घिरा हुआ है. शहरी क्षेत्र में लालदरवाजा और मिर्ची तालाब इलाके के कई घरों में पानी घुस गया है. लालदरवाजा श्मशान घाट के पास बसे मोहल्ले में भी घरों में पानी पहुंच गया है. चुआबाग, चंदनबाग और हेरूदियारा इलाकों में जलजमाव की स्थिति बनी हुई है. मुंगेर-पटना मुख्य मार्ग पर चुआबाग के समीप भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है.
पेयजल और शौच की समस्या बनी बड़ी चुनौती
बाढ़ के कारण सबसे बड़ी समस्या पेयजल की उत्पन्न हो गयी है. कुएं, चापाकल और हर घर नल का जल बाढ़ के पानी से प्रभावित होकर दूषित होने की स्थिति में हैं. वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
चारों तरफ पानी भर जाने से शौच की समस्या भी गंभीर हो गयी है. घरों में बने शौचालयों में पानी भर गया है. ऐसे में लोगों को जान जोखिम में डालकर सुरक्षित स्थान तलाशने पड़ रहे हैं. बाढ़ के बीच पेयजल और स्वच्छता की समस्या प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है.
डीएम, विधायक और एसपी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का लिया जायजा
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सोमवार को विधायक कुमार प्रणय, जिलाधिकारी निखिल धनराज और पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे. अधिकारियों और जनप्रतिनिधि ने लोगों की समस्याएं सुनीं और राहत एवं बचाव कार्य को लेकर जानकारी ली.
टीम ने हरिणमार और झोवा बहियार का स्थलीय निरीक्षण किया. इस दौरान प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री का वितरण भी किया गया. अधिकारियों ने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं.
सुरक्षित स्थान और राहत शिविर में जाने की अपील
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों से अपील की कि जलस्तर बढ़ने या किसी अन्य आपात स्थिति की आशंका होने पर घरों में रहने के बजाय सुरक्षित स्थानों और जिला प्रशासन की ओर से चिह्नित राहत शिविरों में चले जाएं.
सामुदायिक रसोई में भोजन की गुणवत्ता भी जांची
जिलाधिकारी ने हरिणमार और झोवा बहियार में संचालित सामुदायिक रसोई का भी निरीक्षण किया. उन्होंने रसोई में सफाई व्यवस्था का जायजा लेने के साथ भोजन की गुणवत्ता की जांच की. अधिकारियों को सामुदायिक रसोई में स्वच्छता, पौष्टिकता और समय पर भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.