एएसआइ संतोष हत्याकांड में एक ही परिवार के आठ दोषियों को उम्रकैद, दो मासूम मां के साथ रहेंगे कारा में; जानें खौफनाक वारदात

मुंगेर में होली के दिन एएसआई संतोष कुमार सिंह की पीट-पीटकर हत्या के मामले में अदालत ने एक ही परिवार के आठ सदस्यों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं, जिनमें से दो के छोटे बच्चे अपनी मां के साथ जेल में रहेंगे.

मुंगेर. मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नंदलालपुर गांव में होली के दिन विवाद शांत कराने पहुंचे एएसआइ संतोष कुमार सिंह की पीट-पीटकर हत्या के मामले में सोमवार को अदालत ने एक ही परिवार के आठ सदस्यों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी. एडीजे चतुर्थ कुमारी मनीषा ने मुफस्सिल थाना कांड संख्या 78/2025 एवं सेशन वाद संख्या 299/2025 में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलील सुनने के बाद सभी अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए विभिन्न धाराओं में सजा सुनायी. सजायाफ्ता आठ अभियुक्तों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं. इनमें दो महिलाओं के छोटे बच्चे हैं, जो अपनी मां के साथ ही कारा में रहेंगे.

स्व. नारायण यादव के पांच पुत्रों समेत आठ दोषी

सजायाफ्ता अभियुक्तों में स्व. नारायण यादव के पांच पुत्र रंजीत कुमार, रणवीर कुमार, राजू कुमार, गुड्डू कुमार और विकास कुमार शामिल हैं. इनके अलावा रेखा देवी, रंजीत कुमार की पत्नी सरिता देवी और रणवीर कुमार की पत्नी मौसम कुमारी को भी अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनायी. मामले में तीन महिलाओं को सजा हुई है. इनमें सरिता देवी और मौसम कुमारी के छोटे बच्चे हैं. अदालत के फैसले के बाद दोनों मासूम अपनी मां के साथ ही कारा में रहेंगे.

फोटो- हत्याकांड का सजायाप्ता  | Prabhat Khabar Network

रोहतास के पिपरिया गांव के निवासी थे एएसआइ

मृतक एएसआइ संतोष कुमार सिंह, पिता स्व. दिनेश्वर सिंह, रोहतास जिले के मोहनियां थाना क्षेत्र के पिपरिया गांव के निवासी थे. 14 मार्च 2025 को होली के दिन नंदलालपुर गांव में दो पड़ोसियों के बीच विवाद की सूचना मिलने पर वे 112 की बाइक से सिपाही दीपक कुमार के साथ मौके पर पहुंचे थे. पुलिस टीम का उद्देश्य दोनों पक्षों को समझाकर विवाद शांत कराना था. इसी दौरान एएसआइ संतोष कुमार सिंह अभियुक्तों के आंगन में चले गये.

आंगन में घेरकर लोहे की रॉड और दबिया से हमला

अभियोजन के अनुसार, एएसआइ के आंगन में पहुंचते ही सभी अभियुक्तों ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी. आरोप है कि लोहे की रॉड और दबिया से उनके सिर पर हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी होकर बेहोश हो गये. इसके बाद उन्हें घसीटकर दरवाजे पर छोड़ दिया गया. गंभीर हालत में उनका इलाज कराया गया और बेहतर उपचार के लिए पटना ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी. घटना को लेकर सिपाही दीपक कुमार के लिखित आवेदन पर मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.

अभियोजन और बचाव पक्ष की दलील सुनने के बाद फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से अदालत में अपनी-अपनी दलीलें रखी गयीं. उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने सभी आठ अभियुक्तों को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनायी. अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक संजय कुमार सिंह ने बहस में भाग लिया.

दोषी करार देने के बाद पुलिसकर्मियों से भी की थी मारपीट

मामले में अभियुक्तों को दोषी करार दिए जाने के बाद जब उन्हें पुलिस कैदी वाहन से जेल ले जाया जा रहा था, उसी दौरान हंगामा और सुरक्षा कर्मियों के साथ मारपीट की घटना सामने आयी थी. इस मामले में कोतवाली थाना में अलग प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.

सजा को लेकर न्यायालय परिसर में रही विशेष सुरक्षा

आठ अभियुक्तों को सजा सुनाये जाने को लेकर सोमवार को न्यायालय परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किये गये थे. पुलिस बल की तैनाती के बीच अदालत की कार्रवाई हुई और दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी.

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By Birendra Kumar Sing

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