मुंगेर एके-47 कांड : कमजोर अनुसंधान के चलते साक्ष्य के अभाव में 10 आरोपित बरी

मुंगेर एके-47 कांड : कमजोर अनुसंधान के चलते साक्ष्य के अभाव में 10 आरोपित बरी

2018 में देशभर में चर्चा में रहे एके-47 बरामदगी मामले में ट्रायल के दौरान अभियोजन विफल, पुलिस अनुसंधान पर उठे गंभीर सवाल मुंगेर. वर्ष 2018 में एके-47 हथियारों की बड़ी बरामदगी को लेकर सुर्खियों में आया मुंगेर जिला एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार कारण पुलिस की कामयाबी नहीं बल्कि न्यायालय में अभियोजन की विफलता है. खेत-खलिहानों व घरों के पीछे खुदाई कर 21 एके-47 हथियारों की बरामदगी के दावे के साथ जिस मामले में पुलिस महकमे ने देशभर में वाहवाही लूटी थी, उसी कड़ी में अब आरोपित एक-एक कर दोषमुक्त होने लगे हैं. कमजोर अनुसंधान व ठोस साक्ष्य के अभाव में न्यायालय आरोपित को दोषी ठहराने में असमर्थ साबित हो रहा है. शुक्रवार को एके-47 से जुड़े मुफस्सिल थाना कांड संख्या 353/18 (सत्रवाद संख्या 213/18) में सुनवाई के दौरान मुंगेर के अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय प्रवल दत्ता ने 10 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया. यह मामला एके-47 हथियार के नहीं, बल्कि उसके पार्ट्स की बरामदगी से जुड़ा था. न्यायालय में अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि बरामद पार्ट्स किसी आरोपित की प्रत्यक्ष कस्टडी से मिले थे. खुदाई से बरामदगी, पर साक्ष्य नहीं टिके बताया गया कि इस कांड में पुलिस ने जमीन के अंदर से एके-47 हथियार के पार्ट्स बरामद किये थे. एके-47 हथियार के कथित मास्टरमाइंड शमशेर आलम उर्फ विरो, नियाजुल रहमान उर्फ गूलो व मो रिजवान उर्फ भुट्टो ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में कहा था कि हथियार के पार्ट्स शमशेर के घर से लाये गये थे. उन्हें छुपाने के लिए अजमेरी बेगम को दिया गया था. पुलिस ने अजमेरी बेगम को गिरफ्तार कर रिमांड पर पूछताछ की थी. पूछताछ के दौरान उसने कथित रूप से स्वीकार किया कि उसने पार्ट्स को अपने घर के पीछे बथान में छिपाया है. इसी बयान के आधार पर 30 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बाबू राम की मौजूदगी में जेसीबी से खुदाई कर एक प्लास्टिक के बोरे से भारी मात्रा में एके-47 के पार्ट्स बरामद किये गये थे. इसके बाद मुफस्सिल थाना में तत्कालीन पुलिस निरीक्षक बिंदेश्वरी यादव के बयान पर कांड संख्या 353/18 दर्ज की गयी थी. इस कांड के अनुसंधानकर्ता तत्कालीन एएसपी हरिशंकर प्रसाद थे. ट्रायल में अभियोजन की कमजोरी उजागर हालांकि जब इस मामले का ट्रायल शुरू हुआ तो पुलिस न्यायालय में ठोस साक्ष्य व गवाह प्रस्तुत करने में सफल नहीं हो सकी. न तो बरामदगी को आरोपियों से जोड़ने के पुख्ता सबूत सामने आये, न ही स्वीकारोक्ति बयानों को विधिसम्मत तरीके से प्रमाणित किया जा सका. नतीजतन, इतने गंभीर व चर्चित मामले में न्यायालय ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए रिहा कर दिया. दंपती व तीन भाई भी हुए रिहा रिहा किये गये आरोपियों में पूर्व से जमानत पर मुक्त मो मुस्ताम उर्फ मंगल खान, मो खुर्शीद आलम, परवेज चांद उर्फ भोलू, रिजवान खान, सदा रिफत, मो लुकमान व उनकी पत्नी आइना बेगम शामिल हैं. इसके अलावा एके-47 के अन्य मामले में जेल में बंद तीन भाई गुलफाम उर्फ गुलेन, मो रिजवान उर्फ भुट्टो व तनवीर आलम उर्फ सोनू को भी रिहा कर दिया गया. उल्लेखनीय है कि मो रिजवान उर्फ भुट्टो के कथित खुलासे के बाद ही एके-47 के पार्ट्स की बरामदगी का दावा किया गया था. लोक अभियोजक ने कही अपील की बात इस संबंध में मुंगेर के लोक अभियोजक संजय कुमार सिंह ने बताया कि जिस मामले में आरोपी रिहा हुए हैं, वह एके-47 हथियार का नहीं बल्कि उसके पार्ट्स की बरामदगी का मामला था. पार्ट्स किसी आरोपी की प्रत्यक्ष कस्टडी से बरामद नहीं हुए थे, बल्कि जमीन के अंदर खुदाई कर निकाले गये थे. उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष अब उपलब्ध साक्ष्य व गवाहों के बयानों का अध्ययन कर रहा है कि कहां कमी रह गयी, जिसका लाभ आरोपियों को मिला. जरूरत पड़ी तो इस मामले को लेकर पटना उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की जायेगी.

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Author: RANA GAURI SHAN

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