मनरेगा योजना ठप होने से बढ़ा मजदूरों का पलायन, जनप्रतिनिधि और अधिकारियों के तालमेल पर उठे सवाल
Munger News : गांव में रोजगार देने वाली मनरेगा योजना अब खुद बदहाली का शिकार होती दिख रही है. पंचायत में काम बंद होने से मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है और लोग पलायन को मजबूर हैं.
टेटिया बंबर, मुंगेर से प्रतिनिधि की रिपोर्ट : टेटिया बंबर प्रखंड अंतर्गत धोरी पंचायत में मनरेगा योजना इन दिनों ठप पड़ी है. जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी का सीधा असर विकास कार्यों और मजदूरों के रोजगार पर पड़ रहा है. काम नहीं मिलने से बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं.
योजनाएं स्वीकृत, लेकिन धरातल पर काम बंद
स्थानीय मजदूर बीरबल पासवान, राजा राम मंडल और तरुण मांझी ने बताया कि पंचायत में मनरेगा के तहत कई योजनाएं स्वीकृत हैं, लेकिन धरातल पर कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है.मजदूरों का आरोप है कि कुछ स्थानीय दबंग लोगों द्वारा जानबूझकर योजनाओं को बाधित किया जा रहा है, जिससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है.
रोजगार नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों ने कहा कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य गांव में ही मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें पलायन नहीं करना पड़े. लेकिन धोरी पंचायत में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत बन गयी है.लंबे समय से काम बंद रहने के कारण मजदूर अब मजबूरी में पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं.
विकास कार्य भी हो रहे प्रभावित
मनरेगा कार्य बंद रहने से पंचायत के विकास कार्यों पर भी असर पड़ रहा है. सड़क, मिट्टीकरण, जल संरक्षण और अन्य योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं.ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित नहीं हुआ तो पंचायत में हालात और खराब हो सकते हैं.
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों और मजदूरों ने जिला प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर जल्द मनरेगा कार्य शुरू कराने की मांग की है.लोगों का कहना है कि यदि समय पर योजनाएं शुरू हो जाएं तो मजदूरों को गांव में ही रोजगार मिलेगा और पलायन पर रोक लग सकेगी.