मुंगेर शहर के किला परिसर के समाहरणालय एवं किला के पूर्वी द्वार के समीप स्थित बट वृक्ष के समक्ष यहां पूजा-अर्चना की. वहीं महद्दीपुर भगवती स्थान, कासिम बाजार थाना परिसर, बिंदवाड़ा, नौलखा सहित अनेक स्थानों पर सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की विधिवत पूजा कर अपने पति के दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की. मान्यता है कि इसी दिन सतयुग में देवी सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किये थे. तभी से यह व्रत सुहागिनों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है. व्रती महिलाओं ने प्रातःकाल स्नान कर सोलह शृंगार किया और पूजा सामग्री के साथ वट वृक्ष की पूजा के लिए पहुंचीं. सबसे पहले वट वृक्ष को हल्दी का लेप लगाया गया. फिर पीले धागे से सात परिक्रमा करते हुए जल अर्पण किया. व्रत का विधिपूर्वक पालन करते हुए महिलाओं ने श्रद्धा भाव से पूजन-अर्चना कर दिनभर निराहार रहकर व्रत का पालन किया.