एमयू में उच्च शिक्षा व्यवस्था बदहाल, कॉलेजों में चल रहा पीजी विभाग
मुंगेर. एक ओर सरकार वर्तमान डिजिटल युग में विज्ञान व वाणिज्य जैसे विषयों की ओर विद्यार्थियों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है. वहीं मुंगेर विश्वविद्यालय की बदहाल उच्च शिक्षा व्यवस्था के कारण पीजी जैसे उच्च शिक्षा वाले कोर्स के विज्ञान व वाणिज्य संकाय में भी विद्यार्थी नामांकन नहीं ले रहे हैं. इसका अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि एमयू के पीजी विभाग तथा 9 पीजी सेंटर में विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय में लगभग 2 हजार सीटों पर मात्र 715 विद्यार्थियों ने ही नामांकन लिया है. ऐसे में जब सालों से एमयू का पीजी विभाग कॉलेजों में चल रहा है और सरकार से पीजी विभाग के लिए पदों की स्वीकृति मिलने के बावजूद अबतक नियुक्ति नहीं हुई है, तो इन संकायों से विद्यार्थियों का दूर होना बड़ी बात नहीं है.दो हजार सीट पर मात्र 715 नामांकन
बता दें कि एमयू में कुल 20 पीजी विभाग का संचालन होता है. जबकि इसके अंतर्गत आने वाले कुल 9 कॉलेजों में पीजी सेंटर के रूप में पीजी की पढ़ाई होती है. इसमें विज्ञान व वाणिज्य संकाय में लगभग 2 हजार सीट है, लेकिन सत्र 2025-27 पीजी सेमेस्टर-1 में अबतक के चार मेरिट लिस्ट में विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय में इन सीटों के विरुद्ध मात्र 715 विद्यार्थियों ने ही नामांकन लिया है. इसमें विज्ञान संकाय में लगभग 1500 सीटों पर 609 तथा वाणिज्य संकाय के लगभग 500 सीटों पर मात्र 106 विद्यार्थियों ने ही नामांकन लिया है.अनियमित सत्र व बदहाल व्यवस्था से दूर हो रहे विद्यार्थी
एमयू में पीजी जैसे उच्च शिक्षा वाले कोर्स में विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों में विद्यार्थियों के कम नामांकन का मुख्य कारण अनियमित सत्र और बदहाल प्रयोगशालाएं है. बता दें कि सूबे के अधिकांश परांपरागत विश्वविद्यालयों में पीजी के नये सत्र में नामांकन पूर्ण हो चुका है, लेकिन वर्ष 2025 अब समाप्त होने को है और एमयू में पीजी सेमेस्टर-1 में अबतक चार मेरिट लिस्ट में ही नामांकन की प्रक्रिया हो पायी है. अब ऐसे में एमयू में सत्र 2025-27 पीजी का सत्र आरंभ होने से पहले ही अनियमित हो चुका है. इसके अतिरिक्त एमयू के कॉलेजों में सालों से प्रयोगशालाएं बदहाल हैं. जबकि इन कॉलेजों में ही एमयू के पीजी विभागों का भी संचालन होता है. जहां सालों से प्रयोगशालाओं में न तो उपकरण हैं और न ही नियमित रूप से प्रायोगिक कक्षाएं होती हैं. हद तो यह है कि एमयू को अपने पीजी विभागों के लिए पदों की स्वीकृति मिले चार माह हो चुका है, लेकिन अबतक एमयू इन पीजी विभागों में स्थायी रूप से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर पाया है. इसके कारण अबतक पीजी के विद्यार्थियों को वे शिक्षक ही पढ़ा रहे हैं, जिनके कंधों पर कॉलेजों में स्नातक के विद्यार्थियों की भी जिम्मेदारी है.B
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