महीनों से लंबित अनुसंधान, कांडों का अंबार, पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
बीरेंद्र कुमार सिंह, मुंगेरमुंगेर प्रक्षेत्र में हजारों आपराधिक मामलों का अनुसंधान लंबित रहने के कारण पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल रही. प्रक्षेत्र के मुंगेर, जमुई, लखीसराय और शेखपुरा जिलों में कुल 9,385 आपराधिक कांड का अनुसंधान लंबित है. इनमें बड़ी संख्या गंभीर और अतिविशेष मामलों की भी है. लंबित मामलों के कारण पीड़ितों को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. जिसके कारण पीड़ितों का जहां पुलिस पर से विश्वास उठता जा रहा है, वहीं पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं.
जमुई में सबसे अधिक मामले लंबित
आंकड़ों के अनुसार जमुई जिले में 4,674 कांड लंबित हैं, जो पूरे प्रक्षेत्र में सर्वाधिक है. वहीं लखीसराय में 2,578, मुंगेर में 1,576 और शेखपुरा में 557 कांड जांच के अधीन हैं. अप्रैल माह के दौरान मुंगेर प्रक्षेत्र में कुल 1,364 नए कांड दर्ज हुए, जबकि केवल 1,702 मामलों का निष्पादन किया गया. पुलिस अधिकारियों का दावा है कि निष्पादन की गति बढ़ी है, लेकिन लंबित मामलों की कुल संख्या यह बताने के लिए काफी है कि अनुसंधान की प्रक्रिया अभी भी अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ सकी है.
विशेष और अतिविशेष कांड भी अटके
लंबित मामलों में बड़ी संख्या विशेष और अतिविशेष श्रेणी के मामलों की है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 4,631 विशेष तथा 4,754 अतिविशेष कांड अब भी जांच के अधीन हैं. ये वे मामले हैं जिनका समाज और कानून-व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और जिनके त्वरित निष्पादन की अपेक्षा की जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों के लंबित रहने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है. कई मामलों में पीड़ित वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा करते रहते हैं. लंबित कांडों की बढ़ती संख्या से आम लोगों में असंतोष देखा जा रहा है. पीड़ित परिवारों का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ती और कई मामलों में चार्जशीट दाखिल होने में लंबा समय लग जाता है. इससे पीड़ितों को न्याय मिलने में अनावश्यक देरी होती है.
कांडों के बोझ तले दबा पुलिस महकमा
पुलिस महकमे से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कई थानों में अनुसंधान अधिकारियों की संख्या सीमित है, जबकि कांडों का बोझ लगातार बढ़ रहा है. एक अधिकारी के जिम्मे दर्जनों मामलों की जांच होने से निष्पादन की गति प्रभावित होती है. हालांकि आम जनता का सवाल है कि यदि हर महीने सैकड़ों मामलों का निष्पादन हो रहा है, तो लंबित मामलों का आंकड़ा हजारों में क्यों बना हुआ है. यह एक बड़ा सवाल है. जबकि पुलिस मुख्यालय की समीक्षा बैठकों और लगातार दिए जा रहे निर्देशों के बावजूद यदि हजारों मामले वर्षों तक लंबित रहते हैं, तो यह व्यवस्था की कार्यक्षमता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.
कहते हैं पुलिस उप-महानिरीक्षक
मुंगेर प्रक्षेत्र के डीआईजी राकेश कुमार ने कहा कि लंबित अनुसंधान कांडों की नियमित समीक्षा की जा रही है. सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और अनुसंधान अधिकारियों को पुराने मामलों के शीघ्र निष्पादन, वैज्ञानिक जांच और समयवद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि विशेष एवं अतिविशेष श्रेणी के मामलों की निगरानी उच्च स्तर पर की जा रही है और लंबित मामलों की संख्या कम करना विभाग की प्राथमिकता है.
