Jamalpur News: जमालपुर-हावड़ा सुपर एक्सप्रेस को पटना तक विस्तारित करने की चर्चा के बीच जमालपुर में विरोध तेज हो गया है. ट्रेन के परिचालन को पटना तक बढ़ाये जाने के विरोध में मंगलवार को जमालपुर स्टेशन चौक पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का पुतला दहन किया गया. प्रदर्शनकारियों ने इसे जमालपुर की रेल पहचान और यात्रियों की सुविधा से जुड़ा मुद्दा बताते हुए रेलवे के फैसले का विरोध किया.
जमालपुर रेल निर्माण कारखाना संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का नेतृत्व मोर्चा के संयोजक सह समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष पप्पू यादव ने किया. कार्यकर्ताओं ने पहले मारवाड़ी धर्मशाला से नारेबाजी करते हुए स्टेशन चौक तक मार्च किया. यहां पहुंचकर रेल मंत्रालय के खिलाफ आक्रोश जताया गया और पुतला दहन किया गया.
‘जमालपुर से ट्रेन की पहचान खत्म करने की कोशिश’
मोर्चा के संयोजक पप्पू यादव ने कहा कि रेल मंत्रालय पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर जमालपुर की विभिन्न पहचान को धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि जमालपुर-हावड़ा सुपर एक्सप्रेस को पटना तक विस्तारित करने की योजना भी इसी कड़ी का हिस्सा है.
उनके मुताबिक इस ट्रेन का परिचालन पटना से शुरू होने पर जमालपुर की पहचान प्रभावित होगी और स्थानीय यात्रियों की सुविधाएं भी कम होंगी. उन्होंने कहा कि जमालपुर के लोग इस फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे.
उन्होंने यह भी दावा किया कि ट्रेन के पटना से परिचालन होने का असर रेलवे के टीएक्सआर और कैरिज एंड वैगन विभाग से जुड़े रेलकर्मियों पर भी पड़ सकता है. मोर्चा ने आशंका जतायी कि इससे रेल कर्मचारियों की छंटनी की स्थिति बन सकती है.
‘एक सप्ताह में अधिकृत बयान नहीं आया तो चक्का जाम’
प्रदर्शनकारियों ने रेलवे को अब एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है. पप्पू यादव ने कहा कि यदि एक सप्ताह के अंदर रेलवे की ओर से इस मामले में कोई अधिकृत बयान नहीं आता है, तो संघर्ष मोर्चा शहर हित और रेल हित में आंदोलन को और तेज करेगा.
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो मोर्चा रेलवे ट्रैक पर उतरकर चक्का जाम करेगा. इससे साफ है कि ट्रेन के विस्तार का मुद्दा अब केवल विरोध-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहने वाला है. रेलवे की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर जमालपुर में आंदोलन और बड़ा होने की चेतावनी दी गयी है.
‘रेल मंत्रालय क्षेत्र के साथ कर रहा सौतेला व्यवहार’
मोर्चा के सहसंयोजक कन्हैया सिंह और संरक्षक दिनेश सिंह ने कहा कि रेल मंत्रालय और पूर्व रेलवे के अधिकारी लगातार क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे से जुड़े फैसलों का असर केवल ट्रेन परिचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे शहर की स्थानीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होती है. उनका कहना था कि रेलवे से जुड़े छोटे-छोटे कारोबार और दुकानदारों की रोजी-रोटी भी इससे जुड़ी हुई है.
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जमालपुर की रेल पहचान लंबे समय से शहर की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है. इसलिए ट्रेन से जुड़े किसी भी बड़े बदलाव को स्थानीय हितों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए.
‘एशिया का पहला कारखाना, फिर भी जमालपुर के साथ भेदभाव’
महासचिव पप्पी उर्फ पप्पू यादव, प्रवक्ता रविकांत झा, जन सुराज के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश गोप और पूर्व मुख्य पार्षद बबलू पासवान ने कहा कि जिस स्थान पर एशिया महादेश का सबसे प्रथम कारखाना स्थापित है, वहां की महत्वपूर्ण ट्रेन का विस्तार पटना तक किया जाना एक साजिश है.
उन्होंने कहा कि जमालपुर की पहचान रेलवे से गहराई से जुड़ी है. ऐसे में यहां से जुड़ी ट्रेन और रेल सेवाओं में बदलाव का सीधा असर शहर की पहचान और लोगों की सुविधा पर पड़ सकता है.
स्टेशन चौक पर जमकर हुई नारेबाजी
पुतला दहन से पहले संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ता मारवाड़ी धर्मशाला से जुलूस के रूप में स्टेशन चौक पहुंचे. इस दौरान रेलवे और रेल मंत्रालय के खिलाफ नारेबाजी की गयी.
स्टेशन चौक पर पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर आक्रोश जताया और रेलवे से ट्रेन के प्रस्तावित विस्तार को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की.
आंदोलन में पंकज यादव, मिथिलेश यादव, मो. आजम, मनोज क्रांति, रवि शंकर यादव, नौशाद उस्मानी, विपिन यादव, सत्यजीत पासवान, राजीव पटवा, कुणाल भारती, गौरव यादव, सुनील साहू, बहादुर चौधरी और वीरेंद्र मंडल सहित दर्जनों लोग मौजूद थे.
Jamalpur News: अब रेलवे के जवाब पर टिकी नजर
जमालपुर में हुए इस प्रदर्शन के बाद अब निगाह रेलवे की ओर से आने वाले आधिकारिक बयान पर है. संघर्ष मोर्चा ने साफ कर दिया है कि एक सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा.
यात्रियों और स्थानीय कारोबारियों के लिए भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रदर्शनकारियों का दावा है कि ट्रेन के परिचालन में बदलाव का असर केवल यात्रियों पर नहीं, बल्कि जमालपुर की रेल आधारित अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा.
फिलहाल रेलवे की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई अधिकृत प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है. यदि रेलवे की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती है, तो जमालपुर में विरोध और तेज होने की संभावना है.
