एमयू के कार्यालय आदेश में वेतन के साथ पूर्व के कार्य से पेंशन लेने वालों को दस्तावेज जमा करने का निर्देश

मुंगेर विश्वविद्यालय ने शनिवार 11 अप्रैल को एक कार्यालय आदेश जारी किया है. इसमें 2017 से अबतक योगदान देने वाले वैसे शिक्षक, जो अपने पूर्व के कार्य से सेवानिवृत्त होने या पदत्याग करने के बाद भी अपने पूर्व के कार्य से पेंशन प्राप्त कर रहे हैं तथा विश्वविद्यालय से भी पूर्ण वेतन प्राप्त कर रहे हैं.

एमयू का कार्यालय आदेश खुद खड़े कर रहा विश्वविद्यालय के प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल

ऐसे मामलों में कार्रवाई की जगह खुद दोषियों से विश्वविद्यालय मांग रहा जानकारी

मुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय ने शनिवार 11 अप्रैल को एक कार्यालय आदेश जारी किया है. इसमें 2017 से अबतक योगदान देने वाले वैसे शिक्षक, जो अपने पूर्व के कार्य से सेवानिवृत्त होने या पदत्याग करने के बाद भी अपने पूर्व के कार्य से पेंशन प्राप्त कर रहे हैं तथा विश्वविद्यालय से भी पूर्ण वेतन प्राप्त कर रहे हैं. वैसे शिक्षक अपने पूर्व के सेवा विवरणी सात दिनों के अंदर विश्वविद्यालय में जमा कराना सुनिश्चित करेंगे. अब विश्वविद्यालय का यह कार्यालय आदेश खुद विश्वविद्यालय के कार्य प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है. इसमें विश्वविद्यालय द्वारा खुद ऐसे दोषियों की जांच कर उसके विरुद्ध कार्रवाई करने की जगह उन्हें अपना दस्तावेज विश्वविद्यालय में जमा करने का निर्देश दिया जा रहा है. यह हाल तब है, जब सरकार के नियमानुसार पेंशन के साथ पूर्ण वेतन पाना गैरकानूनी कार्य है. साथ ही इस प्रकार की सूचना छिपना भी खुद में गैरकानूनी कार्य है.

बता दें कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी कार्यालय आदेश में कहा गया है कि विभिन्न माध्यमों से ऐसी सूचना प्राप्त हो रही है कि पिछले दिनों विश्वविद्यालय अंतर्गत स्नातकोत्तर विभाग व अंगीभूत महाविद्यालय में ऐसे शिक्षकों/शिक्षकेत्तर कर्मियों (वर्ष 2017 से नियुक्त) ने योगदान किया है. जो यहां योगदान करने से पूर्व कहीं और कार्यरत थे. साथ ही ये भी पता चला है कि पूर्व की सेवा से सेवानिवृत्ति/पदत्याग के पश्चात वहां से वे पेंशन प्राप्त कर रहे हैं तथा इसके साथ मुंगेर विश्वविद्यालय से अपनी सेवा के लिए पूर्ण वेतन भी पा रहे हैं, जो गैरकानूनी है. इस तरह के शिक्षकों/शिक्षकेत्तर कर्मियों को निर्देशित किया जाता है कि अपने पूर्व की सेवा की विवरणी (यथा प्राप्त हो रहे पेंशन, अनापत्ति प्रमाण पत्र आदि) अद्योहस्ताक्षरी कार्यालय में सात कार्य दिवस में जमा कराना सुनिश्चित करेंगे, अन्यथा की स्थिति में इस तरह के गैरकानूनी कार्य की जानकारी होने पर कार्रवाई की सारी जिम्मेदारी संबंधित शिक्षक/शिक्षकेत्तर कर्मचारी की होगी.

कार्रवाई की जगह विवरणी जमा करने का निर्देश

एमयू के कार्यालय आदेश ने खुद विश्वविद्यालय के कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया है. सूत्रों के अनुसार, बीते दिनों विश्वविद्यालय को कोशी कॉलेज, खगड़िया में एक शिक्षक द्वारा अपने पूर्व के कार्य से पेंशन लेने के साथ विश्वविद्यालय से पूर्ण वेतन लेने की शिकायत प्राप्त हुई, लेकिन अब मामले की जांच करने और इस प्रकार के अन्य मामले विश्वविद्यालय में होने की जांच करने की जगह अब विश्वविद्यालय खुद ऐसे शिक्षकों को अपना विवरणी जमा करने का निर्देश दिया जा रहा है, जबकि यह मामला गैरकानूनी है. इतना ही नहीं यह हाल तब है, जब बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग या बीपीएससी से नियुक्त ऐसे शिक्षकों का नियोक्ता खुद विश्वविद्यालय है.

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By AMIT JHA

AMIT JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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