मुंगेर में दहेज के लिए पत्नी को जिंदा जलाने वाले पति को उम्रकैद, चार साल बाद अदालत ने सुनाया बड़ा फैसला

Munger Court Verdict :मुंगेर व्यवहार न्यायालय ने दहेज के लिए पत्नी को जिंदा जलाने के जुर्म में पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. चार साल की लंबी लड़ाई के बाद पीड़िता के परिवार को न्याय मिला है.

मुंगेर से राणा गौरी शंकर की रिपोर्ट

Munger Court Verdict : मुंगेर व्यवहार न्यायालय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक गुप्ता की अदालत ने धरहरा थाना क्षेत्र के मानगढ़ गांव निवासी संजीत कुमार को अपनी पत्नी खुशबू देवी की दहेज के लिए हत्या करने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया. इसके अलावा दहेज प्रताड़ना के मामले में उसे तीन वर्ष के कारावास की सजा भी सुनाई गई.

इलाज के दौरान दिए बयान बने अहम साक्ष्य

अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक शाहिद कमाल ने अदालत को बताया कि 27 जून 2021 को दहेज की मांग को लेकर आरोपी ने कथित रूप से अपनी पत्नी पर किरासन तेल छिड़ककर आग लगा दी थी. गंभीर रूप से झुलसी खुशबू देवी को इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) ले जाया गया, जहां 1 जुलाई 2021 को उनकी मौत हो गई. अभियोजन के अनुसार, इलाज के दौरान दिए गए उनके फर्द बयान में उन्होंने अपने पति को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया था. इसी बयान के आधार पर धरहरा थाना में मामला दर्ज हुआ और पुलिस ने जांच पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया.

साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर हुई दोषसिद्धि

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत गवाहों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया. अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अदालत के इस फैसले को दहेज हत्या के मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है.

'चार साल बाद मिला न्याय'

फैसले के बाद मृतका के भाई सोहन कुमार ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि उनकी बहन की शादी घटना से करीब दो वर्ष पहले हुई थी. उनका आरोप है कि विवाह के बाद आरोपी लगातार दहेज की मांग करता था और खुशबू देवी को प्रताड़ित करता था. उन्होंने यह भी दावा किया कि परिवार को बाद में आरोपी के पूर्व विवाह और दूसरी शादी की जानकारी मिली थी. सोहन कुमार ने कहा कि चार वर्षों तक परिवार ने न्याय के लिए संघर्ष किया और अब अदालत के फैसले से उन्हें संतोष मिला है. उनके अनुसार, इस निर्णय से उनकी बहन की आत्मा को भी शांति मिली होगी.


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By अमित कुमार सिन्हा

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