रोजेदारों ने अल्लाह से बरकत, शांति और मुल्क की तरक्की की मांगी दुआ
रमजान के पवित्र महीने के तीसरे जुमे (शुक्रवार) की नमाज अकीदत और अमन-चैन की दुआओं के साथ अदा की गयी.
अकीदत के साथ अदा की गयी तीसरे जुमा की नमाज, इबादत के लिए एक साथ उठे सैकड़ों हाथ
मुंगेर. रमजान के पवित्र महीने के तीसरे जुमे (शुक्रवार) की नमाज अकीदत और अमन-चैन की दुआओं के साथ अदा की गयी. जिले भर की मस्जिदों में भारी भीड़ उमड़ी, जहां नमाजियों ने अल्लाह से बरकत, शांति और मुल्क की तरक्की की दुआ मांगी. जामा मस्जिद, खानकाह मस्जिद सहित शहर से लेकर गांव तक की मस्जिदों में इमामों ने खुतबा पढ़ा. शुक्रवार की दोपहर 12:30 बजे जैसे ही अजान की आवाज आई तो लोगों ने मस्जिदों की ओर रुख करना शुरू कर दिया. सफेद कुर्ता, पायजामा, लुंगी और सर पर टोपी पहन कर घरों से निकले. बड़ों का हाथ पकड़ बच्चे भी मस्जिदों में पहुंचे. शहर के जामा मस्जिद में बड़ी संख्या में लोगों ने जुमे की नमाज अदा की, जबकि गुलजार पोखर, बेलन बाजार, मुर्गियाचक, किला के अंदर की मस्जिद, नया गांव, हजरतगंज, खानकाह की मस्जिद, दिलावरपुर, शाहजुबैर रोड, रायसर सहित शहर से लेकर गांव तक की मस्जिदो में नमाज अदा की गयी. जहां नमाज से पहले तकरीर करते हुए इमाम ने शब-ए-कद्र और एतकाफ की फजीलत बयां की. उन्हें बताया कि मुकद्दस रमजान का पूरा महीना ही रहमतों का है. इस महीने के आखिरी अशरे की पाक रातों में शबे कद्र की रात होती है, जो हजार महीनों की रातों से अफजल है.
रमजान का तीसरा अशरा हुआ शुरू
रमजान का तीसरा अशरा जहन्नुम के अजाब से आजादी का है. यह रोजेदारों के लिए सबसे अहम है. इसी तीसरे अशरे में कुरान नाजिल हुई थी. रवायत के मुताबिक रमजान के इस अंतिम अशरे में शब-ए-कद्र की पांच रातें इबादत के लिहाज से हजार रातों पर भारी है. लिहाजा तीसरे अशरे में रोजेदार पूरी शिद्दत से इबादत करते हैं. शब-ए-कद्र की पांच रातों में रोजेदार कोशिश करते हैं कि वह पूरी रात अल्लाह की इबादत करें, क्योंकि इन रातों में की गयी हर दुआ कबूल होती है. रमजान के 21, 23, 25, 27 और 29 की रात खास इबादत की रात है. गुनाहों की माफी की रात है. इन पांच रातों में मस्जिदों में कुरान की तिलावत और नमाज का सिलसिला बढ़ जाता है.