संग्रामपुर. संग्रामपुर प्रखंड में जल संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे जल-जीवन-हरियाली अभियान की जमीनी हकीकत चिंताजनक नजर आ रही है. भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर के बीच जहां एक ओर सरकार लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही है. वहीं दूसरी ओर विभागीय लापरवाही के कारण योजनाएं दम तोड़ती दिखाई दे रही हैं.
पूर्व में ग्राम पंचायत के माध्यम से प्रखंड मुख्यालय से होकर गुजरने वाली बेलहरनी नदी के तट पर स्थित झिकुली पंचायत के चंदनिया क्रीड़ा मैदान से लक्ष्मीपुर शिवालय तक मनरेगा के तहत हजारों पौधे लगाए गए थे. वही पौधों की सुरक्षा के लिए बांस से बने चचरीनुमा घेरों की भी व्यवस्था की गई थी, लेकिन देखरेख के अभाव में आज वहां एक भी पौधा नजर नहीं आ रहा है. अधिकांश पौधे या तो सूख गए या पशुओं का चारा बन गए. स्थिति इतनी गंभीर है कि पौधों की सुरक्षा के लिए लगाए गए बांस के घेरे भी अब गायब हो चुके हैं. कुछ लोगों ने इन्हें जलावन के रूप में इस्तेमाल कर लिया तो कुछ ने अपने घरों के छप्पर में लगा लिया. जो न केवल विभागीय उदासीनता, बल्कि स्थानीय स्तर पर जागरूकता की भी कमी भी दर्शाता है. विदित हो कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई सात निश्चय महत्वाकांक्षी योजना में कई विभागों की सहभागिता तय की गई थी, ताकि राज्य में बढ़ते जल संकट से निपटा जा सके, लेकिन बावजूद इसके धरातल पर योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है.जल-जीवन-हरियाली योजना के हजारों पौधे व बांस के गेबियन गायब
संग्रामपुर प्रखंड में जल संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे जल-जीवन-हरियाली अभियान की जमीनी हकीकत चिंताजनक नजर आ रही है.
