ड्यूटी बदली तो चिकित्सक ने नहीं किया हस्ताक्षर, दो घंटे की देरी से हार्ट मरीज को मिला एंबुलेंस

सदर अस्पताल में अब दलालों की सक्रियता और मरीजों को निजी नर्सिंग होम ले जाने का खेल इस कदर हावी हो चुका है कि इस खेल में अस्पताल प्रशासन पूरी तरह उलझ कर रह गया है

8.10 बजे 102 पर बुक किया, मरीज को 10 बजे प्रबंधक के आदेश पर मिला एंबुलेंस

मुंगेर.

सदर अस्पताल में अब दलालों की सक्रियता और मरीजों को निजी नर्सिंग होम ले जाने का खेल इस कदर हावी हो चुका है कि इस खेल में अस्पताल प्रशासन पूरी तरह उलझ कर रह गया है. जबकि इस खेल के बीच मरीजों की जान आफत में आती जा रही है. कुछ ऐसा ही हाल मंगलवार को सदर अस्पताल में देखने को मिला. जब सुबह 7.31 बजे में हार्ट अटैक के एक रेफर मरीज को लगभग दो घंटे बाद एंबुलेंस मिल पाया. हलांकि मरीज के परिजनों द्वारा 8.10 बजे ही 102 पर कॉल पर एंबुलेंस बुक किया गया, लेकिन मरीज के परिजनों को अस्पताल से निकलने में 10 बज गया. हद तो यह रही कि एंबुलेंस भी चिकित्सक की जगह अस्पताल प्रबंधक के परमिशन पर निकला. सोमवार रात ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डा. रौशन कुमार ने कासिम बाजार निवासी 33 वर्षीय गणपति राज को हार्ट अटैक की शिकायत पर पीएमसीएच के आइजीआइसी पटना रेफर किया गया. जिसके बाद परिजनों द्वारा 102 पर कॉल कर 8.10 बजे एंबुलेंस बुक किया गया. जिसमें कॉल सेंटर से मरीज को लेकर जाने के लिये बीआर-01पीपी-1540 को दिया गया, लेकिन सुबह 8.10 में एंबुलेंस बुक होने के बाद मरीज को पूर्वाह्न 10 बजे एंबुलेंस मिला. जिससे परिजन मरीज को लेकर पटना के लिये निकले. अब सवाल यह है कि सदर अस्पताल में छह एंबुलेंस होने के बावजूद हार्ट अटैक जैसे गंभीर बीमारियों में मरीजों एंबुलेंस मिलने में ढ़ाई घंटे क्याें लग जा रहा है.

लॉग बुक पर चिकित्सक का हस्ताक्षर होना जरूरी

मुंगेर :

नियमानुसार मरीज को रेफर किये जाने के बाद एंबुलेंस के लॉग बुक पर चिकित्सक का हस्ताक्षर होना जरूरी है. जबकि बिना चिकित्सक के हस्ताक्षर के एंबुलेंस मरीज को लेकर अधिकारी की अनुमति से ही जा सकता है, लेकिन मरीज को लेकर एंबुलेंस चिकित्सक की जगह अस्पताल प्रबंधक की स्वीकृति पर निकला. अब ऐसे में सवाल उठता है कि तीनों शिफ्ट में इमरजेंसी में चिकित्सक के होने के बावजूद क्यों अस्पताल प्रबंधक को एंबुलेंस लेकर जाने की स्वीकृति देनी पड़ी.

बोले अस्पताल उपाधीक्षक

अस्पताल उपाधीक्षक डा. रमन कुमार ने बताया कि संबंधित मरीज को डा. रौशन द्वारा रेफर किया गया था, लेकिन उसके बाद उनकी ड्यूटी बदल गयी. जिसके बाद दूसरे शिफ्ट के चिकित्सक डा. हर्षवद्धन एंबुलेंस के लॉग बुक पर हस्ताक्षर नहीं किया. जिसके बाद अस्पताल प्रबंधक तौसिफ के निर्देश पर एंबुलेंस को मरीज के साथ भेजा गया.

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Author: DHIRAJ KUMAR

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