तारापुर में अधूरा पुल बना कांवरियों का ठिकाना, थकान मिटाने के साथ भोजन बना रहे श्रद्धालु

सुल्तानगंज से देवघर की ओर जाने वाले कांवरियों के लिए गोगाचक के पास एक निर्माणाधीन पुल एक अनोखा पड़ाव बन गया है. तेज धूप और लंबी यात्रा की थकान से परेशान श्रद्धालु इस अधूरी संरचना की छांव में आराम कर रहे हैं और भोजन की तैयारी कर रहे हैं. यह स्थान यात्रा के बीच एक अप्रत्याशित राहत का केंद्र बन गया है.

Munger News: तारापुर में कंधे पर कांवर, पैरों में लंबी यात्रा की थकान और सामने बाबाधाम की मंजिल. सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर की ओर बढ़ रहे कांवरियों के लिए रास्ते में मिलने वाली थोड़ी-सी छांव भी बड़ी राहत बन जाती है. ऐसे में तारापुर क्षेत्र में गोगाचक के पास निर्माणाधीन पुल इन दिनों कांवरियों के लिए अनोखा पड़ाव बन गया है.

बंशीपुर से बिहमा की ओर निकलने वाली रिंग रोड पर स्थित यह पुल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है. निर्माण कार्य अधूरा होने के बावजूद पुल के नीचे की जगह कांवरियों को तेज धूप से बचने के लिए छांव दे रही है. कई श्रद्धालु यहां कुछ देर रुककर आराम कर रहे हैं, जबकि कुछ कांवरिया यहीं बैठकर भोजन और चाय-पानी की तैयारी करते नजर आ रहे हैं.

धूप और थकान के बीच मिला राहत का ठिकाना

श्रावणी मेले के दौरान कांवरियों को सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है. लगातार चलने के बाद शरीर को कुछ देर आराम की जरूरत होती है. खासकर दिन में तेज धूप के बीच सड़क पर आगे बढ़ना श्रद्धालुओं के लिए काफी मुश्किल होता है.

गोगाचक के पास निर्माणाधीन पुल की छांव ऐसे ही समय में कांवरियों के काम आ रही है. श्रद्धालु जमीन पर प्लास्टिक या कपड़ा बिछाकर कुछ देर बैठते हैं. कोई पैरों को आराम देता है तो कोई परिवार या साथियों के लिए भोजन तैयार करता नजर आता है.

कई कांवरियों के लिए यह जगह रास्ते में मिला ऐसा पड़ाव है, जहां कुछ देर रुकने के बाद वे फिर कांवर उठाकर अपनी यात्रा पर निकल पड़ते हैं.

अधूरे निर्माण के बीच बन गया कांवरियों का अस्थायी पड़ाव

बंशीपुर-बिहमा रिंग रोड का यह हिस्सा कांवरिया मार्ग से जुड़ा है. गोगाचक के पास पुल का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है. सामान्य परिस्थितियों में निर्माणाधीन ढांचा लोगों के लिए उपयोग की जगह नहीं माना जाता, लेकिन श्रावणी मेले के दौरान इसकी छांव कांवरियों के लिए राहत का साधन बन गयी है.

पुल के आसपास रुकने वाले श्रद्धालु लंबे समय तक यहां ठहरने के बजाय अपनी थकान मिटाने के लिए कुछ समय बिताते हैं. कुछ लोग भोजन तैयार करने के बाद आगे बढ़ जाते हैं.

इस तरह निर्माणाधीन पुल का इस्तेमाल फिलहाल कांवरियों के लिए किसी औपचारिक विश्राम स्थल के रूप में नहीं, बल्कि रास्ते में उपलब्ध प्राकृतिक राहत के तौर पर हो रहा है.

कांवरियों ने कहा- थोड़ी देर रुकने में क्या है गलत?

निर्माणाधीन पुल के पास विश्राम कर रहे श्रद्धालुओं से जब इस बारे में बातचीत की गयी तो उनका कहना था कि वे यहां किसी तरह की परेशानी पैदा करने के लिए नहीं रुक रहे हैं. उनका मकसद सिर्फ यात्रा के दौरान कुछ देर आराम करना है.

एक कांवरिया ने कहा, "क्या इस पर थोड़ी देर रुकना गैर-कानूनी है? हम तो कुछ समय की थकान मिटाने के लिए ठहरे हैं, फिर अपनी मंजिल की ओर निकल जाएंगे."

श्रद्धालुओं ने कहा कि लंबी पैदल यात्रा के दौरान जहां भी थोड़ी छांव मिलती है, वहां कुछ देर रुक जाना उनके लिए बड़ी राहत होती है.

सरकार के निर्माण ने दी भीषण धूप में राहत

कांवरियों ने निर्माणाधीन पुल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. उनका कहना था कि सरकार की ओर से तैयार किया जा रहा यह ढांचा अभी भले पूरा नहीं हुआ हो, लेकिन फिलहाल इसकी छांव उन्हें गर्मी से राहत दे रही है.

श्रद्धालुओं के लिए यात्रा के दौरान हर छोटी सुविधा महत्वपूर्ण होती है. कुछ मिनटों की छांव, बैठने की जगह और भोजन-पानी तैयार करने का अवसर भी लंबी पैदल यात्रा में काफी राहत देता है.

Munger News: अधूरा पुल पूरा होने के बाद बढ़ेगी उपयोगिता

निर्माणाधीन पुल का काम पूरा होने के बाद इसकी वास्तविक उपयोगिता सामने आएगी. फिलहाल श्रावणी मेले के दौरान इसके आसपास कांवरियों की आवाजाही और अस्थायी विश्राम ने इसे अलग तरह की पहचान दे दी है.

कांवरियों के लिए यह जगह किसी निर्धारित सेवा शिविर की तरह विकसित नहीं है, फिर भी यात्रा के बीच मिलने वाली छांव के कारण यहां श्रद्धालु कुछ देर रुक रहे हैं. थकान मिटाने के बाद कांवर कंधे पर रखते हैं और फिर उसी उत्साह के साथ बोल बम का जयघोष करते हुए बाबाधाम की ओर बढ़ जाते हैं.

राहत का ठिकाना: गोगाचक के पास निर्माणाधीन पुल के समीप जमीन पर बैठकर विश्राम करते और भोजन-पानी की तैयारी करते श्रद्धालु कांवरिया. | Prabhat Khabar Network

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लेखक के बारे में

By संजय वर्मा

संजय वर्मा प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. तारापुर (भागलपुर) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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