धरहरा
प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों पर व्यवस्था में सुधारने के बजाय लगातार बदहाल हो रहा है. कभी बच्चों से जुठा वर्तन धुलवाया जाता है, तो कभी पोषाहार में कटोती की जा रही है. बुधवार को तो हद हो गया जब राशि बचाने के चक्कर में केंद्र संचालक द्वारा अंडे की जगह बच्चों को खीरा का छोटा-छोटा टुकड़ा परोस कर भरपाई की गयी.ताजा मामला प्रखंड के ईटवा पंचायत अंतर्गत पचरूखी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-35 का है. बुधवार को आईसीडीएस विभाग की ओर से जारी मेनू के अनुसार बच्चों को पोषाहार के साथ अंडा दिया जाना था, लेकिन केंद्र पर सेविका ने बच्चों को अंडे की जगह खीरे का छोटा-छोटा टुकड़ा सलाद के रूप में देकर खानापूर्ति कर दी. ग्रामीणों का आरोप है कि यह सरकार द्वारा पोषाहार मद में दी जा रही राशि की खुली लूट को दर्शाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित सेविका माधुरी कुमारी द्वारा महज दस रुपये का खीरा खरीदकर करीब 16 बच्चों के बीच बांट दिया गया और अंडे की भरपाई कर दी गयी. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि महादलित परिवारों के बच्चों को जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर पोषाहार में कटौती की जा रही है.
10:30 बजे नहीं भरी गयी थी उपस्थिति पंजी
ग्रामीणों के अनुसार केंद्र पर सुबह 10:30 बजे तक केवल 16 बच्चे मौजूद थे, जबकि सेविका द्वारा मौखिक रूप से 35 बच्चों की उपस्थिति होने की बात कही गई. हैरानी की बात यह रही कि 10:30 बजे तक बच्चों की उपस्थिति पंजी भी नहीं भरी गई थी. इसे लेकर लोगों ने सवाल उठाया कि जब केंद्र का संचालन सुबह 7:30 बजे से 11:30 बजे तक होता है, तो निर्धारित समय के काफी बाद तक उपस्थिति दर्ज नहीं करना गंभीर अनियमितता को दर्शाता है. वहीं आईसीडीएस विभाग की एक पर्यवेक्षिका द्वारा यह कहना कि विभाग से फल मद में केवल एक रुपये का प्रत्येक बच्चे के नाम पर आवंटन मिलता है, लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. ग्रामीणों का आरोप है इससे साफ प्रतीत होता है कि पोषाहार में हो रही गड़बड़ी में निचले स्तर से लेकर विभागीय अधिकारियों तक की मिलीभगत हो सकती है.
कहती है सीडीपीओ
सीडीपीओ अमृता कुमारी ने कहा कि मामले की जानकारी मिली है. संबंधित सेविका से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.
