मिट्टी की बनी वस्तुओं पर इलेक्ट्रॉनिक बल्वों ने बनाई जगह, मिट्टी के दीये की डिमांड हुई कम

जनार्दन पंडित ने बताया कि 50 रुपये में मिट्टी की मूर्ति उपलब्ध हो जाती है.

असरगंज दीपों का पर्व दीपावली में महज कुछ ही दिन शेष रह गए हैं. दीपावली त्योहार को लेकर कुंभकारों द्वारा दीया एवं मूर्ति बनाने का काम जोर-शोर से किया जा रहा है. असरगंज क्षेत्र के मासूमगंज, विक्रमपुर, कुंभकार टोला, मारवाड़ी टोला, धान गोला एवं ममई में लगभग एक दर्जन परिवार मिट्टी के दिये एवं मूर्ति को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं. विक्रमपुर के कुंभकार सुरेश पंडित, जनार्दन पंडित, विनोद पंडित, पवन पंडित, मुरली पंडित, राजेश पंडित, अमित पंडित, सीताराम पंडित, सत्येंद्र पंडित एवं ममई गांव के अमित पंडित ने बताया कि बाजार में इलेक्ट्रॉनिक लाइट एवं प्लास्टर ऑफ पेरिस के कारण मिट्टी के दीये एवं मूर्ति की मांग कम हो गई है. लागत एवं मेहनत के अनुरूप आय नहीं हो पाता है. जबकि मिट्टी से बने सामग्री को आग में पकाने का खर्च बढ़ गया है. इधर जनार्दन पंडित ने बताया कि 50 रुपये में मिट्टी की मूर्ति उपलब्ध हो जाती है. अधिक आय नहीं होने के कारण नई युवा पीढ़ी बाहर कमाने चले जाते हैं. इधर छठ पर्व को लेकर भी कुंभकार टोले में सूर्य भगवान की मूर्ति बनाई जा रही है. मासूमगंज के सिंघो पंडित, झारखंडी पंडित, विनोद पंडित, जोगिंदर पंडित, प्रदीप पंडित ने बताया कि बाजार में मिट्टी के दीये की मांग अधिक है. लेकिन मिट्टी उपलब्ध होने में काफी परेशानी हो रही है. पंडितों का मानना है कि दीपावली में मिट्टी के दीये का उपयोग शुद्धता का प्रतीक है. यही कारण है कि आज भी लोग मिट्टी के दीये से ही पूजा करना उचित समझते हैं.

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Published by: Anand kumar

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