मुंगेर से अमित झा की रिपोर्ट : कोरोना काल के बाद से ही मुंगेर सदर अस्पताल लंबे समय तक सर्जन के अभाव से जूझता रहा. करीब तीन वर्षों तक अस्पताल में नियमित सर्जन नहीं रहने के कारण मरीजों को छोटी-बड़ी सर्जरी के लिए भागलपुर, पटना या निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा. इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की आर्थिक परेशानी भी बढ़ी.
अप्रैल महीने में जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धरहरा से सर्जन डॉ रॉबिन की प्रतिनियुक्ति सदर अस्पताल में की गई थी, तब लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब ऑपरेशन की सुविधा बहाल हो सकेगी. लेकिन यह राहत ज्यादा दिन टिक नहीं सकी.एक महीने में ही सर्जन ने छोड़ दी जिम्मेदारी
सदर अस्पताल में प्रतिनियुक्ति पर आए सर्जन डॉ रॉबिन ने अब इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद अस्पताल में फिर से सर्जन का पद खाली हो गया है. इससे मरीजों को सबसे अधिक परेशानी इमरजेंसी और ऑपरेशन सेवाओं में हो रही है.सूत्रों की मानें तो अस्पताल में संसाधनों की कमी, कार्य का दबाव और बेहतर सुविधाओं का अभाव डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले पर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
ऑपरेशन के लिए मरीजों को करना पड़ रहा पलायन
सर्जन नहीं होने के कारण अब सदर अस्पताल में ऑपरेशन संबंधी सेवाएं लगभग ठप पड़ गई हैं. दुर्घटना, अपेंडिक्स, हर्निया और अन्य सर्जिकल मामलों के मरीजों को दूसरे शहरों में रेफर किया जा रहा है. इसका सीधा असर गरीब मरीजों पर पड़ रहा है, जो निजी अस्पतालों का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं.स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला मुख्यालय के सबसे बड़े अस्पताल की यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करती है.स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे बड़े सवाल
लगातार सर्जनों की कमी और डॉक्टरों के इस्तीफे ने मुंगेर की स्वास्थ्य सेवाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. लोगों की मांग है कि सरकार स्थायी सर्जन की नियुक्ति कर अस्पताल की व्यवस्था मजबूत करे, ताकि मरीजों को इलाज के लिए दूसरे जिलों का रुख न करना पड़े.
