सदर अस्पताल इमरजेंसी वार्ड में रात्रि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक के साथ दुर्व्यवहार, देख लेने की दी धमकी

दो करोड़ रंगदारी देने अन्यथा ड्यूटी पर नहीं आने की धमकी दिया

– पीड़ित चिकित्सक ने सीएस, डीएस एवं एसपी को सौंपा ज्ञापन, नहीं मिली सुरक्षा की गारंटी तो दे देंगे इस्तीफा

– दलालों के चंगुल में कराह रहा सदर अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड, लगातार चिकित्सकों के साथ हो रहा मारपीट व दुर्व्यवहार

मुंगेर

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मुंगेर सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में गुरुवार की रात असमाजिक तत्वों ने जमकर बबाल काटा और ड्यूटी पर तैनात डॉ हर्षवर्धन के साथ दुर्व्यवहार किया. असमाजिक तत्वों का दुस्साहस यहीं खत्म नहीं हुआ, बल्कि चिकित्सक के मोबाइल पर कॉल कर देख लेने की धमकी दी. हालांकि सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस जब तक अस्पताल पहुंची, तबतक सभी भाग निकले थे. इधर पीड़ित चिकित्सक ने सीएस, डीएस, एसपी एवं कोतवाली थाना को लिखित शिकायत कर जहां कार्रवाई की मांग की, वहीं सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलने पर इस्तीफा देने की बात कह दी है.

पीड़ित चिकित्सक डॉ हर्षबर्धन ने एसपी को दिये आवेदन में कहा है कि गुरुवार की रात वह अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का इलाज कर रहे थे. तभी रात करीब 10:30 बजे पंकज पटेल अपने साथियों के साथ पहुंचे और सरकारी कार्य में बाधा डालने लगे. मना करने पर उसने उनके साथ दुर्व्यवहार किया. उसने दो करोड़ रंगदारी देने अन्यथा ड्यूटी पर नहीं आने की धमकी दिया और कहा कि बम से उड़ा देंगे. जब तक कोतवाली थाना पुलिस पहुंची, तब तक सभी फरार हो गये. उसके बाद पंकज पटेल ने 7091448466 नंबर से उनके मोबाइल पर काल गालियां दी और देख लेने की धमकी दी. उन्होंने इसको लेकर कोतवाली थाना में भी आवेदन दिया है. जिस पर पुलिस जांच-पड़ताल कर रही है. उन्होंने कहा अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और अस्पताल में सुरक्षा की गारंटी नहीं मिली तो वे इस्तीफा दे देंगे.

लगता है दलालों का जमावाड़ा

सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से बीमार मरीज को प्राइवेट नर्सिंग होम ले जाने वाले दलालों का जमावाड़ा लगा रहता है. निजी नर्सिंग के दलालों की सक्रियता यहां काफी है. जबकि यहां चारों ओर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी है. बावजूद सदर अस्पताल के अंदर और बाहर बिचौलियों और दलालों की सक्रियता सुबह से रात तक रहती है. जो इस फिराक में रहते हैं कि गंभीर मरीज को फुसलाकर निजी नर्सिंग होम पहुंचाया जाये, जहां उन्हें कमीशन के रूप में निजी नर्सिंग होम से 5 से 10 हजार रूपये तक मिल जाता है. हद तो यह है कि इमरजेंसी, आईसीयू, पुरूष वार्ड और महिला वार्ड में भर्ती मरीजों के बीच ही बिचौलिये अधिक सक्रिय रहते हैं. इतना ही नहीं यहां पर प्राइवेट एंबुलेंस चालक भी सक्रिय है. जो मौका मिलते ही मरीजों को निजी नर्सिंग होम पहुंचाने का काम करते है. सदर अस्पताल में तीन-चार ऐसे चिकित्सक है जो इन दलालों को तरजीह देते है और मरीजोें को बीमारी से मौत का डर दिखा कर निजि नर्सिंग होम भेज देते है.

पीट रहे चिकित्सक, तमाशा देख रहे जिम्मेदार

गुरुवार की रात डॉ हर्षवर्घन के साथ दुर्व्यवहार की जो घटना घटित हुई वह कोई पहली और आखरी घटना नहीं है. इससे पहले भी कई चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट की घटना घट चुकी है. चिकित्सक जिम्मेदारों को पत्र लिख कर सुरक्षा की गारंटी मांगती तो जरूर है, लेकिन कुछ ही दिनों में मामला शांत होने पर चिकित्सक की मांग दब जाती है. क्योंकि जिम्मेदार पूरी तरह से मौन है. सूत्रों की माने तो यहां कई ऐसे चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी है. जो निजी नर्सिंग होम में दलालों के माध्यम से मरीज भेजते है. जिसका खामियाजा अन्य चिकित्स्क व स्टॉफ को झेलना पड़ता है. इतना ही नहीं निजी नर्सिंग होम मरीज भेजने को लेकर कई बार दलालों के बीच मारपीट व गोलीबारी की भी घटना घट चुकी है. लेकिन जिम्मेदार चुपचाप तमाशा देख रही है.

कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक

सदर अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ निरंजन ने बताया कि घटना की जानकारी मिली है. चिकित्सक ने लिखित शिकायत भी किया है. सिविल सर्जन को इस मामले से अवगत करा दिया गया है.

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Published by: Birendra kumar sing

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