मुंगेर का ऐतिहासिक दशभुजी दुर्गा स्थान: भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र, विवाह जैसे शुभ कार्यों के लिए आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं लोग

मुंगेर जिला मुख्यालय के मोगल बाजार स्थित प्राचीन दशभुजी दुर्गा स्थान न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि आसपास के कई जिलों के श्रद्धालुओं के लिए अगाध श्रद्धा और आस्था का मुख्य केंद्र बना हुआ है. यहाँ स्थापित मां दुर्गा की दस हाथों वाली (दशभुज) अलौकिक प्रतिमा के दर्शन और पूजन के लिए सालों भर भक्तों का तांता लगा रहता है.

दर्शन मात्र से दूर होते हैं कष्ट, हर मन्नत पूरी करती हैं मां

‘आज का दर्शन’ श्रृंखला के तहत मुंगेर शहर के उत्तरी भाग मोगल बाजार में स्थित इस भव्य मंदिर की महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है. दशभुजी मां दुर्गा मंदिर को लेकर पौराणिक और स्थानीय मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहाँ आकर मां के चरणों में शीश नवाता है, मां उसकी झोली खुशियों से भर देती हैं. यही कारण है कि इस मंदिर में मुंगेर शहर ही नहीं, बल्कि सुदूर ग्रामीण इलाकों और पड़ोसी जिलों से भी लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर मां के दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं.

मांगलिक कार्यों की शुरुआत के लिए विशेष रूप से विख्यात है दरबार

दशभुजी दुर्गा मंदिर की एक और बड़ी विशेषता यह है कि लोग अपने घरों में होने वाले किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य की शुरुआत मां का आशीर्वाद लेकर ही करते हैं. विशेष रूप से विवाह, मुंडन, और उपनयन (जनेऊ) जैसे पवित्र संस्कारों के अवसर पर नवदंपति और परिवार के लोग मां के चरणों में धोती-साड़ी और चुनरी अर्पित कर सुखी जीवन की कामना करने पहुंचते हैं. यहाँ प्रतिदिन सुबह और शाम को होने वाली पारंपरिक महाआरती का माहौल पूरी तरह दिव्य होता है. शंख, घड़ियाल और घंटों की मधुर ध्वनि के बीच जब मां की आरती शुरू होती है, तो पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है और उपस्थित श्रद्धालु घंटों इस स्वर लहरी में डूबे रहते हैं.

नवरात्र में उमड़ता है जनसैलाब, मंदिर की घंटियों से गूंजता है इलाका

यूं तो मंदिर में आम दिनों में भी प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना और जलार्पण के लिए पहुंचते हैं, जिससे मंदिर की घंटियों की गूंज से पूरा उत्तरी क्षेत्र प्रतिदिन गुंजायमान रहता है. लेकिन, आश्विन और चैत्र मास में पड़ने वाले वासंतिक व शारदीय नवरात्र के समय यहाँ की भव्यता और भीड़ कई गुना बढ़ जाती है. नवरात्र के नौ दिनों तक यहाँ चौबीसों घंटे विशेष अनुष्ठान और पाठ किए जाते हैं. अपने परिवार की खुशहाली, आरोग्य और मंगल कामना के लिए महानिशा पूजा और अष्टमी के दिन खोइच्छा भरने के लिए महिलाओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ता है, जिसके लिए स्थानीय पूजा समिति और प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं.

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Published by: Divyanshu Prashant

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