पत्नी बोलीं, अगर समय पर खोजबीन होती तो शायद बच जाती जान
मुंगेरनया रामनगर थाना क्षेत्र के महमदा गांव में गुरुवार को मातम, आक्रोश और चीख-पुकार का ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. आरपीएफ कांस्टेबल धर्मेंद्र कुमार का शव जैसे ही एंबुलेंस से उनके पैतृक आवास पहुंचा, पूरे गांव में कोहराम मच गया. परिजनों की चीत्कार और ग्रामीणों के गुस्से से माहौल पूरी तरह गमगीन हो उठा. विदित हो कि भागलपुर में ड्यूटी के दौरान उसकी हत्या कर अपराधियों ने शव गंगा किनारे फेंक दिया था.
25 मई को हत्या कर शव फेंक दिया था गंगा किनारे
बताया जाता है कि वर्ष 2009 बैच के आरपीएफ जवान धर्मेंद्र कुमार वर्तमान में भागलपुर जिला के लैलख ममलखा आउटपोस्ट पर तैनात थे. 25 मई की रात फरक्का एक्सप्रेस गुजरने के बाद से ही उनका मोबाइल बंद आ रहा था. काफी देर तक संपर्क नहीं होने के बाद परिजनों ने इसकी शिकायत आरपीएफ के अधिकारी एवं उसके साथ काम करने वालों कॉल कर पूरी जानकारी दी. उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद सुल्तानगंज के कालूगंज के पास नदी किनारे से धर्मेंद्र कुमार का शव बरामद किया गया. ड्यूटी पर तैनात जवान की बेरहमी से हत्या और शव को नदी किनारे फेंके मिलने के बाद परिजनों में आक्रोश व्याप्त है.
शव पहुंचते ही मचा कोहराम, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
गुरुवार की सुबह मृतक का शव नयारामनगर थाना क्षेत्र के महमदा गांव एंबुलेंस से पहुंचा. शव पहुंचते ही परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था. पत्नी शव से लिपट कर दहाड़ मार रोये जा रही थी. जबकि बच्चों का भी रो-रो कर बुरा हाल था. इधर सूचना के बावजूद विभाग की ओर से गंभीरता नहीं दिखाए जाने को लेकर परिवार और ग्रामीणों में भारी नाराजगी है. मृतक के मित्र सुरेश कुमार ने आरोप लगाया कि विभाग की घोर लापरवाही के कारण खोजबीन में देरी हुई. बाद में उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद सुल्तानगंज के कालूगंज के पास नदी किनारे से धर्मेंद्र कुमार का शव बरामद किया गया. घटना को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है. लोगों ने हत्यारों की जल्द गिरफ्तारी और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.
पत्नी ने सिस्टम पर लगाया गंभीर आरोप
मृतक की पत्नी रानी देवी पति का शव देखते ही बेसुध हो गईं. रोते-बिलखते उन्होंने विभागीय लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा, 30 मई को छुट्टी लेकर घर आने वाले थे, लेकिन उससे पहले उनकी लाश घर पहुंच गई. अगर समय रहते विभाग खोजबीन करता तो शायद आज वह जिंदा होते. उनके इस दर्दनाक बयान ने वहां मौजूद लोगों को झकझोर कर रख दिया. मृतक के दोनों बेटे हर्ष आर्यन (18) और राज आर्यन (12) पिता के शव से लिपटकर फूट-फूटकर रोते रहे. पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा रहा. महिलाओं की चीख-पुकार और परिजनों के विलाप से माहौल बेहद भावुक हो गया.
कहते है आरपीएफ अधिकारी
आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त हीरा प्रसाद सिंह ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. आरपीएफ कमांडेंट और जिला एसपी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है. एसपी ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है.
