मुंगेर में जल-जीवन हरियाली पर कचरे का हमला, बेलहरनी नदी बनी डंपिंग ग्राउंड
Munger News : एक तरफ सरकार जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर ‘जल-जीवन हरियाली’ अभियान चला रही है, तो दूसरी तरफ संग्रामपुर नगर पंचायत में एक नदी को ही कचरा फेंकने का ठिकाना बना दिया गया है. हालात ऐसे हैं कि नदी किनारे कचरे के ढेर, दुर्गंध और मरे हुए पशुओं के अवशेष लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा.
संग्रामपुर, मुंगेर से रिपोर्ट
Munger News : संग्रामपुर नगर पंचायत क्षेत्र की बेलहरनी नदी इन दिनों गंभीर प्रदूषण की चपेट में है. ग्रामीणों का आरोप है कि नगर पंचायत से निकलने वाले ठोस और तरल कचरे को नियमित रूप से नदी किनारे डंप किया जा रहा है. इससे न केवल नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है, बल्कि जल गुणवत्ता भी तेजी से खराब हो रही है. स्थानीय लोगों में इसे लेकर भारी नाराजगी है.
कचरे से सिकुड़ रही नदी की चौड़ाई
ग्रामीणों के अनुसार लगातार कचरा फेंके जाने से बेलहरनी नदी का दायरा धीरे-धीरे कम होता जा रहा है. नदी किनारे जमा कचरे के कारण जल प्रवाह प्रभावित हो रहा है और कई स्थानों पर नदी का स्वरूप बदलने लगा है. लोगों का कहना है कि यदि यह स्थिति जारी रही तो भविष्य में नदी के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो सकता है.
प्रदूषित पानी से बढ़ा पशुओं में बीमारी का खतरा
कचरे से निकलने वाले दूषित तत्व नदी के पानी में मिल रहे हैं. पशुपालकों का कहना है कि नदी का पानी पीने वाले मवेशियों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. कई पशुओं के बीमार पड़ने की शिकायत भी सामने आई है. इससे ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है.
दुर्गंध से लोगों का जीना हुआ मुश्किल
नदी किनारे जमा कचरे और मृत पशुओं के अवशेषों से उठने वाली बदबू ने आसपास के लोगों का जीवन प्रभावित कर दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि दिनभर दुर्गंध के कारण घरों में रहना मुश्किल हो गया है. गर्मी के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है.
तीन साल बाद भी नहीं बना डंपिंग यार्ड
ग्रामीण संजय यादव, प्रवीण कुमार, सुभित यादव और शंकर शर्मा समेत अन्य लोगों का कहना है कि नगर पंचायत गठन के करीब तीन वर्ष बाद भी ठोस कचरा प्रबंधन के लिए डंपिंग यार्ड या कचरा प्रबंधन इकाई स्थापित नहीं की जा सकी है. इसके कारण नगर क्षेत्र का कचरा कभी बांध, कभी डांड, कभी खाली मैदान और कभी नदी किनारे फेंका जा रहा है.
जल संरक्षण के दावों पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जल स्रोतों को ही प्रदूषण से नहीं बचाया जा रहा है तो जल संरक्षण अभियान का उद्देश्य कैसे पूरा होगा. ग्रामीणों ने प्रशासन से बेलहरनी नदी में कचरा डंपिंग पर तत्काल रोक लगाने और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है.
भूमि नहीं मिलने से अटका कचरा प्रबंधन केंद्र
इस संबंध में नगर पंचायत के स्वच्छता पदाधिकारी जय प्रकाश कुमार ने बताया कि कचरा प्रबंधन इकाई की स्थापना के लिए भूमि उपलब्ध कराने को लेकर अंचल अधिकारी को दो बार लिखित आवेदन दिया जा चुका है. लेकिन अब तक भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई है. इसी कारण स्थायी डंपिंग यार्ड का निर्माण नहीं हो सका है.
आंदोलन की चेतावनी
नगरवासियों का कहना है कि नगर पंचायत गठन के वर्षों बाद भी डंपिंग यार्ड के लिए भूमि चिन्हित नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है. लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे.