बरियारपुर : मुंगेर के बरियारपुर प्रखंड में बाढ़ ने विकराल रूप धारण कर लिया है. प्रखंड के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. प्रखंड कार्यालय, अंचल कार्यालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर भी बाढ़ की चपेट में आ गये हैं. कार्यालय परिसरों में पानी जमा होने से सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है.
कई विद्यालयों में घुसा बाढ़ का पानी, पढ़ाई बंद
बाढ़ का पानी मध्य विद्यालय फुलकिया ब्रह्मस्थान, मध्य विद्यालय दीवानी टोला समेत कई विद्यालयों में प्रवेश कर गया है. इसके कारण स्कूलों को बंद करना पड़ा है और बच्चों का पठन-पाठन पूरी तरह प्रभावित हो गया है.
वहीं, प्रखंड कार्यालय, अंचल कार्यालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में करीब एक फीट पानी जमा हो चुका है. स्थानीय लोगों के अनुसार, जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो शनिवार की रात तक कार्यालय परिसर में पानी दो फीट से अधिक हो सकता है.
बांध ऊंचा करने की मांग, हर साल बालू की बोरियों से होती है खानापूर्ति
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रखंड कार्यालय के पीछे और ऋषिकुंड हॉल्ट के समीप बने बांध को ऊंचा और मजबूत करने की मांग हर साल उठती रही है. मीडिया और ग्रामीणों की ओर से भी कई बार इस समस्या को सामने लाया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका.
आरोप है कि हर साल खानापूर्ति के लिए लाखों रुपये खर्च कर बांध के ऊपर बालू से भरी बोरियां रख दी जाती हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवस्था बाढ़ के तेज पानी को रोकने में सक्षम नहीं है.
इस बार भी प्रखंड कार्यालय के पीछे और ऋषिकुंड हॉल्ट के समीप बांध से पानी ओवरफ्लो होकर गांधीपुर और बरियारपुर बस्ती की ओर प्रवेश कर रहा है. इससे खेतों में लगी फसलें डूब रही हैं. मवेशियों के लिए लगायी गयी चारे की फसल भी पानी में डूब गयी है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि दोनों बांधों को समय रहते दुरुस्त और ऊंचा कर दिया जाता तो बाढ़ के दौरान कम से कम कुछ दिनों तक मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था बनी रहती. अब फसलें डूब जाने से पशुपालकों की परेशानी भी बढ़ गयी है.
सामुदायिक किचन शुरू नहीं, बाढ़ पीड़ितों के सामने भोजन का संकट
समाचार लिखे जाने तक बरियारपुर प्रखंड में कहीं भी सामुदायिक किचन शुरू नहीं किया गया था. इससे बाढ़ प्रभावित गरीब परिवारों के सामने भोजन की समस्या खड़ी हो गयी है.
ग्रामीणों के अनुसार, कई परिवार किसी तरह गांव से निकलकर सड़क किनारे या रेलवे लाइन के आसपास टेंट लगाकर रहने को मजबूर हैं. ऐसे परिवारों को खाने-पीने की व्यवस्था के लिए भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. कई लोग किसी तरह रूखा-सूखा खाकर समय गुजार रहे हैं.
बाढ़ प्रभावित लोगों ने प्रशासन से तत्काल सामुदायिक किचन शुरू करने, सुरक्षित स्थानों पर आश्रय की व्यवस्था करने और बांधों की स्थिति सुधारने की मांग की है.
