असरगंज (मुंगेर). प्रखंड के विभिन्न विषहरी मंदिरों में तीन दिवसीय पूजा-अर्चना शुरू होने के साथ ही धार्मिक माहौल बन गया है. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां विषहरी की प्रतिमा स्थापित कर श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों के पट खोल दिए गए. विक्रमपुर विषहरी मंदिर में बड़ी संख्या में महिलाओं ने पूजा-अर्चना की. इस दौरान मां विषहरी के गीतों से पूरा मंदिर परिसर गूंजता रहा.
विभिन्न मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
मासूमगंज, विक्रमपुर, पुरानी एवं नई बिहुला स्थान असरगंज सहित विभिन्न विषहरी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी रही. विशेष रूप से विक्रमपुर मंदिर में महिलाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी रही. श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना की.
गाजे-बाजे के साथ निकली बाला लखेंद्र की बारात
सोमवार देर शाम विक्रमपुर सहित अन्य बिहुला-विषहरी मंदिरों से बाला लखेंद्र की बारात धूमधाम से निकाली गई. गाजे-बाजे और भक्ति गीतों के बीच निकली शोभायात्रा ने नगर पंचायत असरगंज का भ्रमण किया. रास्ते में विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों पर बारात रुकी, जहां पूजा-अर्चना की गई.
सैकड़ों श्रद्धालु शोभायात्रा में हुए शामिल
विक्रमपुर पूजा समिति के योगेंद्र साह, संजय नायक, संजय सुपर, संजय यादव, विष्णुदेव यादव, दीपक कुमार, पंकज पंजियारा, जितेंद्र चौधरी, राम सेवक चौधरी सहित सैकड़ों श्रद्धालु शोभायात्रा में शामिल हुए. बारात के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला.
मां बिषहरी को नागों की देवी मानने की परंपरा
लोक मान्यता के अनुसार मां मनसा बिषहरी को नागों की देवी माना जाता है. पौराणिक कथा के मुताबिक व्यापारी चांद सौदागर ने शुरुआत में मां की पूजा नहीं की थी. बाद में उनकी पुत्रवधू बहुला के अटूट विश्वास और पति लखेंद्र के लिए किए गए त्याग से प्रसन्न होकर मां ने उसके मृत पति को जीवनदान दिया. तभी से बिहार, बंगाल और झारखंड में बिहुला-लखेंद्र की कथा के साथ मां बिषहरी की पूजा की परंपरा चली आ रही है.
सर्पदंश से रक्षा और सुख-समृद्धि की मान्यता
श्रद्धालुओं में मान्यता है कि मां बिषहरी सर्पदंश से रक्षा करती हैं और संतान, सुख एवं समृद्धि का वरदान देती हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में बिषहरी गीत, बारात और भंडारे का विशेष महत्व रहता है.
मेले में भी उमड़ी भीड़
पूजा के साथ क्षेत्र में मेले का भी आयोजन किया गया है. देर शाम बड़ी संख्या में लोग मेला देखने पहुंचे. बच्चों और परिवारों ने मेले में लगे विभिन्न मनोरंजन के साधनों का आनंद लिया. पूजा और मेले के कारण असरगंज का माहौल देर रात तक भक्तिमय और उत्सवपूर्ण बना रहा.
