लापरवाही. आठ माह पहले ही नगर निगम ने खरीदे हैं 45 कूड़ेदान
मुंगेर शहर का चौक-चौराहा आज कूड़ेदान बना हुआ है और लोग खुले में कचरा फेंक रहे हैं. जबकि नगर निगम ने आठ माह पूर्व ही 45 कूड़ेदान खरादी था, जो कस्तूरबा वाटर वर्क्स के परिसर में सड़ रहा है. गुणवत्ता जांच व भुगतान के पेच में उन कूड़ेदानों का उपयोग नहीं हो रहा. इस कारण सड़क किनारे कचरा फेंकना लोगों की मजबूरी बनी है.
मुंगेर : खुबसूरत शहर मुंगेर को कूड़े-कचरे का ग्रहण लग गया है. शहर का अधिकांश चौक-चौराहा कचरा का डंपिंग यार्ड बना है. लेकिन निगम प्रशासन लोगों को स्वच्छ व्यवस्था देने में नकामयाब है. एक ओर इस शहर को स्मार्ट सिटी के अनुरूप तैयार करने की कवायद चल रही है, तो दूसरी ओर पिछले माह स्वच्छता मानकों की जांच करने आयी भारत सरकार की क्यूसीआइ टीम ने शहर को स्वच्छता मानक के अनुरूप नहीं पाया. क्योंकि शहर में न कहीं कूड़ेदान मिल और न ही स्वच्छता जागरूकता के लिए बैनर-पोस्टर दिखे.
सड़क बना है कूड़ेदान
मुंगेर शहर की अधिकांश सड़कें कूड़ेदान बना हुआ है. मुख्य बाजार से लेकर मुहल्ले तक की स्थिति बदतर है. मुख्य बाजार के एसबीआइ बाजार ब्रांच, नंदकुमार पार्क श्रवण बाजार, गुलजार पोखर, तोपखाना बाजार, शास्त्री चौक, सादीपुर मछली बाजार, एसबीआइ मेन ब्रांच के सामने, माधोपुर बड़ गाछ, राइसर, मकससपुर तेल गोदाम, मनिया चौराहा, महद्दीपुर ब्राह्मणटोला, कासिम बाजार, टैक्सी स्टैंड के समीप, बेकापुर जुबली वेल पुल, दिलावरपुर, शाहजुबेर रोड सहित दर्जनों स्थानों को नगर निगम ने अघोषित रूप से कूड़ादानी बना दिया है. जहां लोग खुले में कूड़ा फेंकते हैं.
कस्तूरबा वाटर वर्क्स में पड़े हैं कूड़ेदान
मुंगेर नगर निगम ने गत वर्ष 5 मार्च को कोटेशन आमंत्रण सूचना 03/2015-16 के माध्यम से शहर में सफाई के लिए 150 हैंड ट्रॉली, 45 कूड़ेदानी सहित ट्रैक्टर व अन्य सामग्रियों की खरीदारी की. समान की आपूर्ति कादरू इंफ्रास्ट्रक्चर से ली गयी. सभी समानों को नगर निगम के अधीन कस्तूरबा वाटर वर्क्स परिसर में रखा गया. इसमें कुछ सामान का नगर निगम उपयोग कर रहा है तो कुछ सामान जंग खा रहा. ट्रैक्टर, ट्रॉली सहित अन्य सामान का उपयोग सफाई के लिए किया जा रहा. जबकि खरीदे गये 45 कूड़ेदान यूं ही खुले आसमान के नीचे धूप और बरसात की मार झेल कर बरबाद हो रहे हैं. निगम प्रबंधन का कहना है कि समानों की गुणवत्ता की जांच की प्रक्रिया चल रही है और उसके बाद ही उसका उपयोग किया जायेगा. लेकिन यह जांच कब होगी, इसका कुछ पता नहीं चल रहा. जबकि समान आपूर्ति हुए लगभग आठ माह गुजर चुके हैं. वारंटी-गारंटी की सीमा भी धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है.
क्यूसीआइ की टीम ने किया था निरीक्षण
भारत सरकार के क्यूसीआइ की टीम गत माह 11 जनवरी को नगर के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर स्वच्छता की स्थिति का जायजा लिया था. टीम में शामिल सीनियर एसेसर श्यानतन चटर्जी, जूनियर एसेसर प्रीतम परमार व पुष्पेश ने शहर के सब्जी मार्केट, कटघर, तोपखाना बाजार, अस्पताल रोड, मुख्य बाजार, डीजे कॉलेज रोड स्थित कॉलोनी सहित कई मुहल्लों में जाकर स्थलीय अवलोकन किया और शहर में साफ-सफाई, कूड़ा का उठाव, डोर टू डोर कचरा प्रबंधन, खुले में शौच, स्वच्छता जागरूकता के लिए निगम द्वारा चलाये जा रहे अभियान का अवलोकन किया था. उस टीम के सर्वे करने वाले अधिकारियों ने माना था कि स्वच्छता के मानकों पर खरा नहीं उतर रहा. यहां की व्यवस्था में अभी काफी सुधार की आवश्यकता है.
पहले हो चुका है घोटाला
मुंगेर. मुंगेर नगर निगम में सफाई संसाधन और घोटाला का चोली-दामन का साथ रहा है. पूर्व में भी यहां बड़े पैमाने पर कूड़ेदान खरीद में घोटाला किया गया था और वह मामला जब सुर्खियों में आया तो जांच भी हुई तथा अनियमितता साबित भी हुई. किंतु कार्रवाई शून्य रही. जानकार बताते हैं कि पूर्व में यहां कूड़ेदान के खरीद में लाखों का वारा-न्यारा हुआ था. लाखों रुपये की अवैध निकासी भी की गयी. पत्राचार के बाद यह सत्य भी उजागर हुआ था.
गुणवत्ता जांच व भुगतान के पेच में फंसी है सफाई व्यवस्था
सड़क किनारे फेंकते हैं शहर का कचरा
कहते हैं नगर आयुक्त
नगर आयुक्त डॉ एसके पाठक ने बताया कि आपत्ति के आलोक में नगर विकास एवं आवास विभाग को गुणवत्ता जांच के लिए लिखा गया है. बिना गुणवत्ता जांच के कूड़ेदान का उपयोग नहीं किया जा सकता है. वैसे उनका कहना है कि पेन पेपर में अब तक कूड़ेदान रिसीव नहीं हुआ है.
