दूसरे राज्यों के अवैध हथियार का फिनिसिंग सेंटर बना मुंगेर

तस्करी. दो वर्षों में 500 से अधिक अर्धनिर्मित पिस्टल जब्त किये गये मुंगेर : हथियार निर्माण व तस्करी के लिए मुंगेर प्रसिद्ध रहा है. मेड इन मुंगेर हथियार सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि सीमावर्ती कुछ देशों में भी पहुंच रहा है. इसका खुलासा हाल के दिनों में बंगलादेश में घटित हुई एक घटना में भी […]

तस्करी. दो वर्षों में 500 से अधिक अर्धनिर्मित पिस्टल जब्त किये गये

मुंगेर : हथियार निर्माण व तस्करी के लिए मुंगेर प्रसिद्ध रहा है. मेड इन मुंगेर हथियार सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि सीमावर्ती कुछ देशों में भी पहुंच रहा है. इसका खुलासा हाल के दिनों में बंगलादेश में घटित हुई एक घटना में भी हुआ. नेपाल में तो पूर्व से ही मुंगेरिया पिस्टल की आपूर्ति होती रही है. लेकिन अब मुंगेर 9 एमएम पिस्टल का फिनिसिंग सेंटर बन चुका है. पिछले दो वर्ष के दौरान मुंगेर पुलिस एवं रेल पुलिस ने लगभग 500 से अधिक 9 एमएम पिस्टल की बॉडी बरामद की है जो पश्चिम बंगाल से मुंगेर लाया जा रहा था.
लगातार छापेमारी के कारण मुंगेर में अब सीधे तौर पर हथियार निर्माण के बजाय उसका पैटर्न बदल दिया गया है. अब मुंगेर में सिर्फ हथियारों को फिनिसिंग का काम किया जा रहा. पश्चिम बंगाल के कोलकाता, मालदा एवं झारखंड के विभिन्न शहरों में लैथ मशीन पर पिस्टल का बॉडी व बैरल तैयार किया जाता है और उसे मुंगेर लाकर यहां के कारीगर फिनिसिंग टच देते हैं. मुंगेर के अवैध हथियार की मंडी बरदह में बड़े पैमाने पर पिस्टल की बॉडी पहुंचायी जा रही है और उसकी दियारा एवं पहाड़ी क्षेत्रों में ले जाकर फिनिसिंग की जा रही है.
फिनिसिंग सेंटर बना मुंगेर : एसटीएफ पटना एवं मुंगेर पुलिस की संयुक्त छापेमारी में 5 फरवरी को घोरघट के समीप एक लग्जरी वाहन को पुलिस ने जब्त किया. वाहन में बने तहखाना से 160 अर्धनिर्मित पिस्टल व 160 बैरल बरामद हुआ. पुलिस ने तस्कर जीतेंद्र कुमार पंडित को गिरफ्तार किया. उसने बताया कि झारखंड राज्य के साहेबगंज तलझरी से हथियार मुंगेर लाया था.
उसे मनसरीतले मो मेहताब के यहां डिलिवरी करता. जिसे फिनिसिंग टच देकर निर्धारित स्थान व उपभोक्ता को भेजा जाता. जबकि 16 जुलाई 2016 को जमालपुर में 20 अर्धनिर्मित पिस्टल के साथ रोहित कुमार को गिरफ्तार किया गया था. रोहित व जीतेंद्र के बयान से यह तय हो गया कि मुंगेर में हथियारों को फिनिसिंग टच देने का काम बड़े पैमाने पर किया जा रहा है.
कारीगरों की कुशलता दे रहा बढ़ावा : मुंगेर के कारीगर हथियार निर्माण काफी कुशल हैं. पहले मुंगेर में ही लेथ मशीन पर पिस्टल की बॉडी व बैरल तैयार होता था और यहीं फिनिसिंग भी दिया जाता था. इसमें समय लगता था. लेकिन पुलिस दबिश के कारण कारीगरों की परेशानी बढ़ गयी और हथियार के कारोबार से सफेदपोश टाइप के कुछ ठेकेदार जुड़ गये. इसके बाद बॉडी व बैरल पश्चिम बंगाल व झारखंड में बनाया जाने लगा. वहां से तस्करी कर इन अर्धनिर्मित हथियारों को मुंगेर लाया जाता है. जहां पर कुशल कारीगरों द्वारा हथियार को फिनिश किया जाता है.
कहते हैं पुलिस अधीक्षक
पुलिस अधीक्षक आशीष भारती ने कहा कि मुंगेर पुलिस हथियार निर्माण व तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है. सफलता भी हासिल हुआ है. मुंगेर से निर्माता व कारोबारी पुलिस दबिश के कारण पलायन कर गये है. लेकिन कुछ लोग इस कारोबार में अब भी संलिप्त है. उस रैकेट का भी पुलिस खुलासा करने में जुटी हुई है.
पिछले दिनों हुई अर्धनिर्मित पिस्टलों की बरामदगी
16 जुलाई 2016 : जमालपुर में रोहित कुमार 20 अर्धनिर्मित पिस्टल के साथ गिरफ्तार
17 अगस्त 2016 : हावड़ा-जमालपुर एक्सप्रेस ट्रेन में मो आकिब नामक तस्कर 90 अर्धनिर्मित पिस्टल के साथ गिरफ्तार
16 अक्टूबर 2016 : मुंगेर शहर के पूरबसराय में वाहन चेकिंग के दौरान 32 अर्धनिर्मित हथियार बरामद
17 अक्तूबर 2016 : लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस ट्रेन में अमन कुमार झा 10 अर्धनिर्मित पिस्टल के साथ गिरफ्तार
10 दिसंबर 2016 : जमालपुर स्टेशन पर हावड़ा-गया एक्सप्रेस ट्रेन में 20 अर्धनिर्मित पिस्टल व 20 बैरल लावारिस अवस्था में बरामद
5 फरवरी 2017 : घोरघट के समीप जीतेंद्र व संजय 160 अर्धनिर्मित पिस्टल व 160 बैरल के साथ गिरफ्तार

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