छह माह बीत गया सत्र, नहीं हुआ नामांकन

होमियोपैथ कॉलेज. आयुष मंत्रालय ने नये छात्रों के नामांकन पर लगायी रोक मुंगेर के प्रसिद्ध दी टैम्पुल ऑफ हैनिमैन होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल में पढ़ने वाले मेडिकल के छात्रों के भविष्य दावं पर है. क्योंकि शैक्षणिक सत्र का छह माह गुजर गया. किंतु मेडिकल के पार्ट टृ, थ्री, फोर्थ, फिप्थ के छात्रों का अबतक […]

होमियोपैथ कॉलेज. आयुष मंत्रालय ने नये छात्रों के नामांकन पर लगायी रोक

मुंगेर के प्रसिद्ध दी टैम्पुल ऑफ हैनिमैन होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल में पढ़ने वाले मेडिकल के छात्रों के भविष्य दावं पर है. क्योंकि शैक्षणिक सत्र का छह माह गुजर गया. किंतु मेडिकल के पार्ट टृ, थ्री, फोर्थ, फिप्थ के छात्रों का अबतक नामांकन नहीं हुआ है. दूसरी ओर आयुष मंत्रालय ने इस कॉलेज में नये नामांकन पर रोक लगा दी है.
मुंगेर : दी टैम्पुल ऑफ हैनिमैन होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज अस्पताल बिहार का प्रसिद्ध होमियोपैथ कॉलेज रहा है. जहां से अबतक हजारों होमियोपैथ डॉक्टर डिग्री लेकर प्रदेश ही नहीं देश भर में प्रैक्टिस कर रहे हैं. लेकिन हाल के वर्षों में इस मेडिकल कॉलेज की बदहाल व्यवस्था ने इसके अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर दिया है. बदहाली का आलम यह है कि आयुष मंत्रालय ने जहां इस मेडिकल कॉलेज में नये नामांकन पर रोक लगा दी है. वहीं जो पूर्व से इस कॉलेज में शिक्षा ग्रहण कर रहे उसका भी नामांकन अबतक दूसरे पार्ट में नहीं हो पाया है.
जिसके कारण कॉलेज में पठन-पाठन का कार्य भी भगवान भरोसे है. यदि कॉलेज प्रबंधन 30 दिसंबर तक केंद्रीय होमियोपैथ परिषद व आयुष मंत्रालय को अपनी व्यवस्था से संतुष्ट नहीं कर पाती है तो 48 वर्ष पुराने इस मेडिकल कॉलेज पर ग्रहण लग सकता है.
केंद्रीय होमियोपैथ परिषद नई दिल्ली ने पिछले दिनों जब कॉलेज का जांच की, तो इस कॉलेज में मानक के अनुरूप कई कमियां पायी गयी. होमियोपैथ परिषद की रिपोर्ट के आधार पर भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने नये नामांकन पर रोक लगाते हुए कॉलेज प्रबंधन को पूरी व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए अपना पक्ष रखने को कहा है.
इसके लिए प्रबंधन स्तर पर कार्रवाई की जा रही. लेकिन इस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की जो व्यवस्था है वह अत्यंत ही दयनीय व चिंताजनक है. पूर्व से यह मेडिकल कॉलेज ग्रेड सी के तहत है. यहां प्रत्येक सत्र में 50 सीट निर्धारित है. अर्थात प्रतिवर्ष यह कॉलेज 50 होमियोपैथ चिकित्सक को पैदा कर रहा. किंतु व्यवस्था के नाम पर इसे मेडिकल कॉलेज कहना भी मुश्किल है.
छात्रों के भविष्य दावं पर
पार्ट टृ, थ्री, फोर्थ में नहीं हो रहा नामांकन
मुंगेर का यह मेडिकल कॉलेज बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से संबद्ध है. सत्र 2015-16 के सभी पार्ट वन, टृ, थ्री, फोर्थ का परीक्षा अगस्त माह में संपन्न हुआ. यूं तो अबतक इसका परीक्षाफल विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित नहीं किया गया है. किंतु व्यवस्था के तहत पार्ट वन में परीक्षा देने वाले परीक्षार्थी जहां पार्ट टृ तथा पार्ट टू के थ्री में नामांकन लेकर पढ़ाई करते थे. वहीं इस बार सत्र 2016-17 में यहां किसी पार्ट में छात्र-छात्राओं का नामांकन नहीं हो पाया है.
कॉलेज के प्राचार्य डॉ एके तिवारी का कहना है कि छात्रों का वार्षिक शुल्क चार गुना अधिक हो जाने के कारण पार्ट टृ, थ्री, फोर्थ में नामांकन छात्र नहीं करा रहे. पूर्व में जहां प्रतिवर्ष मात्र 15 हजार रुपये शुल्क लिया जाता था. उसे बढ़ा कर अब 60 हजार रुपये कर दिया गया है. अलबत्ता चालू सत्र में यहां एक भी विद्यार्थी नामांकित नहीं है.
कहते हैं प्रभारी प्राचार्य
प्रभारी प्राचार्य डॉ एके तिवारी का कहना है कि वर्तमान में यहां किसी भी पार्ट में किसी भी छात्र-छात्राओं का नामांकन अबतक नहीं हुआ है. इस संदर्भ में नोडल हेड जिलाधिकारी से मार्गदर्शन मांगा जा रहा. क्योंकि 14 नवंबर 2016 को डीएम कार्यालय में हुई बैठक में शुल्क बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया था. जिसमें पुराने सत्र के पठन-पाठन के लिए प्रतिवर्ष 60 हजार रुपये निर्धारित की गयी है.
कहते हैं शासी
निकाय अध्यक्ष
मेडिकल कॉलेज के शासी निकाय के अध्यक्ष अनुमंडल पदाधिकारी कुंदन कुमार ने कहा कि नये सत्र के नामांकन को लेकर जो व्यवधान आयी है उसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा. केंद्रीय होमियोपैथ परिषद एवं आयुष मंत्रालय ने जिन बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब किया है उसे तैयार किया जा रहा है और ससमय उपलब्ध करा दिया जायेगा.

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